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स्वच्छ गंगा के लिए एनजीटी ने शुरू की सख्ती, मांगी रिपोर्ट

Mon, 21 Mar 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 21 Mar 2016 10:46 PM IST
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NGT strict on clean Ganga, seeks report
एनजीटी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने स्वच्छ गंगा मिशन के लिए दूसरे चरण (हरिद्वार से कानपुर गंगा क्षेत्र) का फैसला सुनाने से पहले केंद्र व उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्राधिकरणों पर सख्ती करनी शुरू कर दी है।

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गंगा और उसकी प्रमुख सहायक नदियों में बिना शोधन सीधे निकासी किए जाने वाले औद्योगिक व घरेलू अपशिष्ट को लेकर एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को फटकार भी लगाई है। बेंच ने कहा कि सभी प्राधिकरण स्पष्ट निर्देश लेकर सही तथ्य और आंकड़े ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करें। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।
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सोमवार को सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी ने अपने आंकड़ों के आधार पर ट्रिब्युनल को बताया कि हरिद्वार से कानपुर क्षेत्र के बीच गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे कुल 31 कस्बे बसे हैं। इनसे प्रतिदिन गंगा में बिना शोधन 544 मिलियन लीटर सीवेज (एमएलडी) की निकासी गंगा में होती है। प्रतिदिन पैदा होने वाले अपशिष्ट में महज 176.27 एमएलडी अपशिष्ट का ही शोधन होता है।

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आपस में साझा कर मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट दें

NGT strict on clean Ganga, seeks report
एनजीटी

वहीं, बेंच ने कहा कि प्राधिकरण उसे हर एक कस्बे से निकलने वाले अपशिष्ट की जानकारी मुहैया कराएं। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को एमसी मेहता व गंगा मामले पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान बेंच ने यूपीपीसीबी से पूछा कि सीवेज के शोधन को लेकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्या स्थिति है? स्पष्ट जवाब न मिलने पर बेंच ने अपने निर्देश में कहा कि यूपीपीसीबी, यूपी जल निगम, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) एसटीपी की जानकारी आपस में साझा कर मंगलवार को ट्रिब्युनल को मौजूदा स्थिति से अवगत कराएं। 

एनजीटी कानपुर में गंगा को प्रदूषित करने वाली टैनरीज को शिफ्ट करने के लिए पहले ही कह चुका है। अब टैनरीज औद्योगिक इकाइयों की ओर से एनजीटी में याचिका दाखिल कर गुहार लगाई गई है कि उद्योगों को दूसरी जगह न शिफ्ट किया जाए। वे प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सभी उपाय अपना रहे हैं। औद्योगिक अपशिष्ट शोधन यंत्र (सीईटीपी) को लेकर भी टैनरीज ने ही प्रयास किया है।

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