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वाराणसी कचहरी में खुद किए थे सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर, सामने आया चौंकाने वाला सच

Thu, 22 Aug 2019 10:40 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 22 Aug 2019 10:40 AM IST
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Narendra Nath Dubey Adig had himself forged signatures of MP in Varanasi court
फाइल फोटो
40 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर कर उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन करने वाले वाराणसी निवासी नरेन्द्र नाथ दुबे अडिग (50) गिरफ्तारी मामले में नया खुलासा हुआ है। नरेन्द्र को किसी भी सांसद ने ना तो समर्थन देकर हस्ताक्षर किए थे और ना ही अपना लैटर हैड दिया था। 
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आरोपी ने उनके समर्थन के फर्जी लैटर तैयार करने के अलावा खुद ही सभी सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर किए। नरेन्द्र नाथ ने फर्जी साइन व लैटर हैड तैयार करने के लिए वाराणसी कोर्ट में साथ काम करने वाले महफूज को ढाई लाख रुपये दिए थे। सभी हस्ताक्षर वाराणसी कचहरी में बैठकर किए गए थे।
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यह भी पढ़ें: वाराणसी : राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ने वाले 'अडिग' को गिरफ्तार कर ले गई दिल्ली पुलिस
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गौरतलब है कि नरेन्द्रनाथ दुबे ने वर्ष 2012 में उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए नोमिनेशन किया था। उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए 20 सांसद प्रस्तावक, जबकि 20 सांसद समर्थक होने चाहिए। आरोपी ने अपने फार्म में 40 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर फर्जी किए थे। 

हालांकि, बाद में नरेन्द्र दुबे का नोमिनेशन रद्द हो गया था। वर्ष 2012 में  कांग्रेस से करीम नगर, आंध्रप्रदेश से सांसद पूनम प्रभाकर की शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा ने वर्ष 2012 में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। 
 

शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि पूनम प्रभाकर समेत 10 सांसदों के हस्ताक्षर के नमूने लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे। सभी सांसदों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। 10 सांसदों को उनके हस्ताक्षर के नमूने भेजने को लेकर नोटिस दिया गया था, मगर उन्होंने जवाब नहीं दिया। 

इसके अलावा उस समय सांसद रहे 20 सांसदों ने दिल्ली पुलिस को जवाब दिया है कि उन्होंने नरेन्द्र दुबे को समर्थन देने वाला कोई लैटरहैड नहीं दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नरेन्द्रनाथ का उपराष्ट्रपति पद के लिए भरा नोमिनेशन रद्द हो गया था। 

नोमिनेशन के रद्द होने के बाद जमा कराए गए 10 हजार रुपये नरेन्द्रनाथ के खाते में वापस आए थे। बैंक में पैसे का आना ही पुलिस के पास सुबूत है कि नरेन्द्र नाथ ने ही उपराष्ट्रपति पद के लिए नोमिनेशन किया था। 

आरोपी ने पूछताछ में बताया कि फर्जी हस्ताक्षर उसके साथ काम करने वाले महफूज ने करवाए थे। नरेन्द्र पेशे से वकील है। वह पार्षद से लेकर राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ा था।
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