PM मोदी ने सुधारी महिला प्रोफेसर की जिंदगी
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नोएडा की एक लॉ कॉलेज की असिस्टेंट महिला प्रोफेसर ने जो कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में सुना था, वह सही साबित हुआ। प्रोफेसर अपनी ग्रेच्युटी पाने के लिए जूझती रही थीं।
जैसे ही उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, उसका जवाब भी आया और उन्हें यूनिवर्सिटी ने ब्याज सहित पूरे पैसे का भुगतान भी कर दिया। पीड़िता ने पूरी दास्तान अमर उजाला को मेल और फोन के माध्यम से बताई।
डॉ. कविता सुरभि ने बताया कि उन्होंने नोएडा की एक नामी यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में 2007-2013 तक काम किया। काम छोड़ने के बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेच्युटी मांगी। उन्हें पैसे की बेहद जरूरत थी इसलिए वह लगातार संघर्ष कर रही थी।
विश्वविद्यालय को काफी मेल भेजे लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अकाउंट विभाग से लेकर फाउंडर मेंबर तक गुहार लगाई गई। इस दौरान अकाउंट विभाग के एक बुजुर्ग कर्मचारी ने उनसे कहा कि मैडम, यहां तो साल-दो साल तक लोगों को पैसा नहीं मिलता, अभी तो आपको सिर्फ सात माह ही हुए हैं। वह भी सिर्फ 40 हजार रुपये के लिए परेशान हो रही हो।
ब्याज सहित दिए पूरे पैसे
मौजूदा समय में नोएडा यूनिवर्सिटी से एलएलएम कर रहीं कविता के मुताबिक, कुछ लोगों के कहने पर वह बार-बार पैसों के लिए मेल करती रहीं। फाउंडर मेंबर की तारीफ लिखकर भी भेजी। लेकिन जब यह बताया गया कि इससे पहले जो भी नौकरी छोड़कर गए हैं, उन्हें कुल राशि का चौथाई भी मिल गया हो तो बड़ी बात है। चूंकि मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जबरदस्त चर्चे चल रहे हैं। तो मन में ख्याल आया कि क्यों न एक पत्र प्रधानमंत्री को लिख दूं।
उन्होंने बताया कि जुलाई 2014 में उन्होंने पूरी बात प्रधानमंत्री को मेल के माध्यम से भेज दी। आश्चर्य हुआ कि पीएम ऑफिस से मेल के माध्यम से जवाब मिला। लेबर कमिश्नर से मिलने के लिए कहा गया। वह उनसे जाकर मिलीं। पीएम की तरफ से कहा गया कि कि मानसिक और शारीरिक संघर्ष के बाद सफलता और अधिकार मिलने का रास्ता जरूर निकलता है।
इतना ही नहीं मेल पीएम ऑफिस से आया था। उसकी कॉपी फाउंडर साहब को भी सीसी की गई थी। इसके बाद तो कमाल हो गया। विश्वविद्यालय से जिस रकम की गुहार लगा रही थीं, उसकी चार गुनी यानी 1.60 लाख यूनिवर्सिटी ने दी। इतना ही नहीं फाउंडर मेंबर ने व्यक्तिगत तौर से मुलाकात भी की और सभी के सामने कहा कि जिन कारणों से तुम्हें कष्ट हुआ है, उसके लिए क्षमा याचना करता हूं।
उन्होंने बताया कि मेरा सारा संघर्ष एक आम आदमी का था। इतनी समर्थ नहीं थी कि अदालत का दरवाजा खटखटा सकती, इसलिए देश के शासक का दरवाजा खटखटाया। न्याय और सफलता मिली। इसके लिए प्रधानमंत्री का हार्दिक आभार।