ये है यूपी चुनाव का जातिगत समीकरण, जानिए क्यों चुप हैं मुस्लिम वोटर
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गौतमबुद्ध नगर में इस बार चुनावी मुद्दा विकास ही है, फिर भी प्रत्याशी ‘मेरे वोटर तेेरे वोटर’ कहते घूम रहे हैं। प्रत्याशी जातिवाद पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं, लेकिन मुस्लिम वोटरों की चुप्पी सभी को बेचैन कर रही है।
मतदान से दो दिन पूर्व कहीं सीधा मुकाबला दिख रहा है तो कहीं त्रिकोणीय। सच्चाई यही है कि चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम अखिलेश यादव, कांग्रेस से राहुल गांधी और बसपा से मायावती के नाम पर ही लड़ा जा रहा है। दरअसल, पिछले 10 साल के चुनावों के समीकरण पर ध्यान दें तो इस बार भी मतदाताओं को बहुत कुछ बदला हुआ नहीं दिख रहा है।
इतना जरूर है कि नोएडा इस बार वीवीआईपी सीट हो गई है, क्योंकि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र चुनाव लड़ रहे हैं। दादरी और जेवर में बहुत कुछ बदला नहीं है और जातिवाद के आधार पर प्रत्याशी वोट मांग रहे हैं।
पूरी सरकार लड़ा रही चुनाव
टक्कर देने के लिए सपा-कांग्रेस प्रत्याशी सुनील चौधरी हैं जिन्हें अखिलेश यादव और राहुल गांधी से बल मिल रहा है। उधर, बसपा प्रत्याशी रविकांत मिश्रा भी पूरी ताकत से डटे हैं। ब्राह्मण चेहरा, पार्टी वोट के अलावा सेक्टरों-गांवों में कड़ी मेहनत की बात कही जा रही है। रालोद से बृजेश यादव भी मैदान में हैं।
दादरी में बहुत कुछ नहीं बदला
दादरी विधानसभा क्षेत्र गुर्जर बहुल है। यही कारण है कि भाजपा ने तेजपाल नागर, बसपा से सत्यवीर गुर्जर, कांग्रेस-सपा से समीर भाटी और रालोद से रविंद्र भाटी चुनाव लड़ रहे हैं। फिलहाल, जो तस्वीर उभरकर आ रही है, उसमें किसी भी प्रत्याशी की लहर वाली बात नहीं है।
मुकाबला त्रिकोणीय है। हार-जीत का फासला बहुत बड़ा होने की संभावना नहीं है। रविंद्र भाटी सीधे मुकाबले में तो नहीं हैं, लेकिन टिकट कटने से वह सपा से खासे नाराज हैं। उनकी नाराजगी किसी प्रत्याशी का खेल बना सकती है तो किसी का बिगाड़ भी सकती है।
जेवर में धुव्रीकरण
क्षेत्र के लोगों से हुई बातचीत के आधार पर गुर्जर और ठाकुर बहुल सीट पर इस बार चुनाव फंसा हुआ है। दो बार से विधायक बसपा से वेदराम भाटी को सीधे टक्कर ठाकुर धीरेंद्र सिंह से मिल रही है। चुनाव जातिगत ध्रुवीकरण की तरफ बढ़ रहा है।
इसी के साथ सपा-कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी नरेंद्र नागर भी खुद को रेस में मान रहे हैं। रालोद प्रत्याशी कमल शर्मा काफी लंबे अर्से से भाजपा से जुड़े रहे थे। अकेले ब्राह्मण प्रत्याशी हैं और क्षेत्र में जाटों की संख्या ठीकठाक है। उनका हर वोट खुद के लिए मायने रखेगा।
चुनाव में हर बार की तरह मुस्लिम वोटर चुप हैं। किसी भी पार्टी की लहर नहीं है, यह मतदाता बखूबी जानते हैं। मुस्लिम वोटर आखिरी वक्त पर फैसला लेता है। अगर वोट बंट गए तो उसका नतीजा बहुत प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन एकतरफा वोटिंग हुई तो निश्चित ही हार-जीत का फासला बड़ा हो सकता है, क्योंकि नोएडा, दादरी और जेवर में ठीकठाक मुस्लिम मतदाता हैं।- प्रो. दुष्यंत कुमार, राजनीति विभाग द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज दनकौर
तीन विधानसभा सीटों पर 36 प्रत्याशी मैदान में
दादरी- 14
नोएडा-14
जेवर-8
कुल -36