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हत्यारी पत्नी और उसके दोस्त को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 01 Dec 2014 01:18 AM IST
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अदालत ने अवैध संबंधों के चलते पति की हत्या करने
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करने वाली महिला और उसके दोस्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने महिला
के तीनों बच्चों की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए यह सजा सुनाई। साथ ही
महिला के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने हाल ही में सुनाए गए अपने फैसले में कहा कि महिला के 16 व 12 वर्षीय पुत्र व 11 वर्ष की पुत्री के बयान ठोस साक्ष्य हैं। तीनों ने पुलिस व अदालत को बताया कि उनके माता-पिता के बीच अकसर झगड़ा होता था।
झगड़े का कारण उनकी मां द्वारा अपने दोस्त को घर पर बुलाना था। 9 अप्रैल 2011 को भी उनकी मां ने अपने दोस्त को घर पर बुलाया था। दोनों ने मिलकर क्रिकेट के बैट से उनके पिता के मुंह, गर्दन व प्राईवेट पार्ट पर वार कर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने पिता के कपड़े बदल कर उन्हें जला दिया। इसके अलावा तीनों को चुप रहने की धमकी दी थी।
अदालत ने महिला के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि ससुराल पक्ष के इशारे में पर उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चे अपनी मां के बेहद करीब होते हैं। इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि बच्चे किसी के कहने पर अपनी मां को फर्जी मामले में फंसाएंगे।
महिला व उसके दोस्त ने कहा कि ससुराल पक्ष के लोग उससे दुश्मनी रखते हैं इसी कारण उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा कि बच्चों के अलावा अन्य गवाहों ने भी कहा है कि मृतक संबंध का विरोध करता था और इसी कारण उसकी हत्या की गई है। अदालत ने माना कि ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है जिससे माना जा सके कि उन्हें दुश्मनी में फंसाया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने हाल ही में सुनाए गए अपने फैसले में कहा कि महिला के 16 व 12 वर्षीय पुत्र व 11 वर्ष की पुत्री के बयान ठोस साक्ष्य हैं। तीनों ने पुलिस व अदालत को बताया कि उनके माता-पिता के बीच अकसर झगड़ा होता था।
झगड़े का कारण उनकी मां द्वारा अपने दोस्त को घर पर बुलाना था। 9 अप्रैल 2011 को भी उनकी मां ने अपने दोस्त को घर पर बुलाया था। दोनों ने मिलकर क्रिकेट के बैट से उनके पिता के मुंह, गर्दन व प्राईवेट पार्ट पर वार कर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ने पिता के कपड़े बदल कर उन्हें जला दिया। इसके अलावा तीनों को चुप रहने की धमकी दी थी।
अदालत ने महिला के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि ससुराल पक्ष के इशारे में पर उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चे अपनी मां के बेहद करीब होते हैं। इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि बच्चे किसी के कहने पर अपनी मां को फर्जी मामले में फंसाएंगे।
महिला व उसके दोस्त ने कहा कि ससुराल पक्ष के लोग उससे दुश्मनी रखते हैं इसी कारण उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा कि बच्चों के अलावा अन्य गवाहों ने भी कहा है कि मृतक संबंध का विरोध करता था और इसी कारण उसकी हत्या की गई है। अदालत ने माना कि ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है जिससे माना जा सके कि उन्हें दुश्मनी में फंसाया गया है।