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एक विधवा के जीवन में रोशनी बिखेर गए वो

अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 19 Feb 2014 05:39 PM IST
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municipal commissioner decision changed life of a widow
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गुड़गांव के नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार के एक फैसले ने एक विधवा और उसके परिवार की जिंदगी बदल दी।
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निगमायुक्त ने न केवल इस बेसहारा परिवार के लिए सहज में आवास की व्यवस्था कर दी बल्कि उक्त विधवा को निगम में अस्थाई नौकरी भी दे दी। मामला निगम के अंतर्गत कन्हैई गांव का है।

यहां की पुष्पा नामक एक विधवा अपनी दो जवान बेटियों, एक बेटे और बूढ़ी सास के साथ पिछले पांच साल से बूस्टिंग स्टेशन के एक कमरे को अपने आशियाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही थी।


निगम गठन से पूर्व पंचायत ने सर्वसम्मति से उसे यहां रहने की अनुमति प्रदान कर रखी थी। इसकी एवज में पुष्पा बगैर किसी पगार के ट्यूबवेल को ऑपरेट कर रही थी।

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करीब डेढ़ महीने पहले उस पर नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज करा दिया गया और उसे खाली करने का फरमान सुना दिया गया। उसने गांव के पूर्व सरपंच एवं पार्षद पति सतीश यादव को अपनी परेशानी बताई। सतीश यादव ने उसे साथ लेकर सोमवार को निगमायुक्त डॉ. कुमार से मुलाकात की।

पुष्पा ने बताया कि वर्ष 1993 में उनकी जमीन का अधिग्रहण हो गया। यह जमीन रहने के लिए उन्हें पंचायत ने ही दी थी। वर्ष 2000 में उसके पति के साथ दुर्घटना हो गई।

मुआवजे के रूप में जो रकम मिली थी वह पति के इलाज में खर्च हो गई। इसके बाद भी उसके पति की जान नहीं बच पाई। उसके साथ बूढ़ी सास, तीन मासूम बच्चों की परवरिश के साथ रहने की समस्या खड़ी हो गई।

आठ साल तक वह जैसे-तैसे किराए पर रहती रही, लेकिन जब बच्चे बड़े होने लगे और उनकी पढ़ाई का खर्च बढ़ने लगा तो उसने वर्ष 2008 में बूस्टिंग स्टेशन में खाली पड़े कमरे में रहने इच्छा जताई। पार्षद सरोज यादव और पूर्व सरपंच सतीश यादव के सहयोग से उसे वहां रहने की अनुमति मिल गई।

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अब उसकी बेटियां शादी लायक हो गई हैं। उसकी बड़ी बेटी बीए अंतिम वर्ष और छोटी बेटी बीएससी अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही है, जबकि बेटा बीटेक कर रहा है। पूरी व्यथा सुनने के बाद निगमायुक्त ने उसे बूस्टिंग स्टेशन में चौकीदार कम ऑपरेटर की अस्थाई नौकरी देकर उसे वहां रहने की इजाजत दे दी।

साथ ही उसके खिलाफ मामला रद्द कराने के लिए मातहतों को आदेश दिए। निगमायुक्त ने हिदायत भी दी कि वहां कमर्शियल गतिविधि किसी भी सूरत में न की जाए। निगमायुक्त के फैसले पर सतीश यादव, अशोक कुमार, दीपक, प्रदीप, माउंट सहित कई ग्रामीणों ने आभार जताया है।

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