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अजित की कोठी पर आया मुलायम का संदेशा

Fri, 19 Sep 2014 08:59 AM IST
Updated Fri, 19 Sep 2014 08:59 AM IST
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Mulayam Singh instructs about muradnagar bawal.

गाजियाबाद के मोदीनगर-मुरादनगर में पुलिस और किसानों के बीच चल रह बवाल के बीच दोपहर को डीआईजी के सत्यनारायण अचानक पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया।

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इसके साथ ही भीड़ केपत्थर का जवाब दे रही पुलिस की लाठियां रुक गईं। दिल्ली के पानी की सुरक्षा कर रही पुलिस को पीछे हटना पड़ा। अधिकारी के आदेश के बाद पुलिसकर्मी चुपचाप पेड़ों की छाव में खड़े हो गए और भीड़ ने गंगनहर रेगुलेटर पर कब्जा जमा लिया।
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सुबह दस बजे से भाकियू एवं रालोद समर्थकों से लोहा ले रही पुलिस दोपहर ढाई बजे एकदम शांत हो गई। मौके पर आंसू गैस के गोले चलने बंद हो गए। बरसती लाठिया शांत हो गई। रबड़ गोलियां डिब्बे में पैक कर ली गई और मूकदर्शक बनी पुलिस टकटकी लगाएं किसानों के ओर से बरस रहे पत्थरों को देखती रही।
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दरअसल, मौके पर पहुंचे डीआईजी के सत्यनारायण ने पुलिस को जवाबी मुकाबला न करने हिदायत दी। सूत्रों का कहना है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से कोई संदेशा आया था। इसके बाद पुलिस एकाएक शांत हो गई। हालांकि यह संदेश क्या था इसे पुलिस अधिकारी बताने से कतराते नजर आए।

कुछ पुलिस अधिकारी तो कहते नजर आए कि खाकी पर भी राजनीति हावी हो गई। बाद में देखते-देखते किसान की भीड़ रेगुलेटर पुल तक पहुंच गई। डीआईजी ने एसएसपी और डीएम के साथ भीड़ में पहुंचकर किसान प्रतिनिधियों से बातचीत की। सिचाई विभाग के दफ्तर में बैठक का दौर चला और किसानों ने भगीरथी और सोनिया विहार हैंड रेगुलेटर पर कब्जा कर लिया।

क्यों और किसके कारण हुआ इतना बड़ा बवाल

Mulayam Singh instructs about muradnagar bawal.

गाजियाबाद के मुरादनगर में बृहस्पतिवार को बवाल अफसरों केकम्युनिकेशन गैप की वजह से हुआ है। पुलिस सूत्रों की मानें तो पहले अफसरों के निर्देश थे कि किसी को भी गंगनहर पर रेगुलेटर तक नहीं जाने देना है, हर हाल में रोकना है। लेकिन जब सारे जतन करने पर भी भीड़ काबू नहीं हुई तो निर्देश दिए गए कि बैकफुट पर आ जाओ।

भाकियू और रालोद नेताओं से वार्ता कर मामले को निपटाओ। जो बाद में किया गया, अगर पहले किया होता तो इतना बवाल नहीं होता। अफसरों में कम्युनिकेशन गैप था।

दूसरी तरफ, इंटेलीजेंस भी भीड़ का मिजाज भांपने में फेल रही। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंटेलीजेंस ने भीड़ का अंदाजा लगभग सही लगाया था। इंटेलीजेंस ने करीब पांच से छह हजार लोगों के आने की रिपोर्ट दी थी। यही वजह थी कि इतना फोर्स तैनात किया गया था। मगर भीड़ रोकने पर इतना उग्र हो जाएगी और गुरिल्ला वार कर देगी, ये अंदाजा नहीं था।

पुलिस-प्रशासन समझ रहा था कि गंगनहर के रेगुलेटर तक पहुंचने वाले रास्तों की नाकाबंदी करने से ही भीड़ रुक जाएगी, लेकिन भीड़ नाकाबंदी से काबू नहीं हुई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मसूरी, मुरादनगर, मोदीनगर, भोजपुर और निवाड़ी क्षेत्रों के लोग रात में ही अबूपुर गांव में जमा हो गए थे। इसके अलावा सुबह को जो भीड़ का रैला आया, वह बागपत से था। सबसे पहले रेगुलेटर तक बागपत के ही लोग पहुंचे।

उधर, एसएसपी गाजियाबाद धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि ‘इंटेलीजेंस रिपोर्ट सही थी। हर प्वाइंट पर पुलिस तैनात थी। भीड़ रोकने की हर संभव कोशिश की गई, मगर भीड़ पर सीधे गोली नहीं चला सकते थे।’

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