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खुलासा: स्कूली बच्चे करते हैं सबसे ज्यादा छेड़छाड़

Thu, 18 Sep 2014 03:05 PM IST
Updated Thu, 18 Sep 2014 03:05 PM IST
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Molestation in delhi by school children.

रेप की राजधानी तक का तमगा पा चुकी दिल्ली में हुए एक सनसनीखेज खुलासे ने इसे और भी शर्मसार किया है।

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दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएसएलए) ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने यह खुलासा करते हुए कहा है कि राजधानी में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के आधार पर शहर की क्राइम मैपिंग की गई है।

इस मैपिंग में जो सच सामने आया है वह चौंकाने वाला है। डीएसएलए का कहना है कि दिल्ली में लड़कियों से छेड़छाड़ के अधिकतर मामले स्कूलों के आस-पास होते हैं।
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इसके आगे का सच और भी चौंकाने वाला है। डीएलएसए के मुताबिक छेड़छाड़ की इन घटनाओं को अंजाम देने वाले कोई गुंडे-मवाली या अराजक तत्व नहीं हैं।

स्कूल से निकलने वाली लड़कियों को छेड़ने में सबसे आगे उन्हीं स्कूल के बच्चे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेकेंड शिफ्ट में स्कूल जाने वाले लड़के उन लड़कियों को छेड़छाड़ का शिकार बनाते हैं जो पहली शिफ्ट खत्म होने पर स्कूल से घर जा रही होती हैं।

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महिलाओं के लिए असुरक्षित 44 'रेड फ्लैग एरिया'

Molestation in delhi by school children.

इस खुलासे के बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस तथ्य की जांच करे कि पिछले साल जेंडर सेंसडाइजेशन प्रोग्राम शुरु करने के बाद भी महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी क्यों नहीं आई है।

दिल्ली पुलिस ने इस साल अप्रैल में ही शहर की 'क्राइम मैपिंग' की थी। इस मैपिंग का मकसद दिल्ली के उन इलाकों की पहचान करना था जहां छेड़छाड़, बलात्कार जैसी घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के आठ जिलों के 44 इलाकों को 'रेड फ्लैग एरिया' के तौर पर चिन्हित किया। ये ऐसे इलाके हैं जहां महिलाओं के ‌खिलाफ अपराध सबसे ज्यादा होते हैं।

'पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग में बताया जाए सच'

Molestation in delhi by school children.

कोर्ट ने सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि दिल्ली में अपराध के मामले नहीं बढ़ें हैं बल्कि उन्हें रिपोर्ट किए जाने के मामले बढ़े हैं।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस की यह दलील हम पिछले 15 साल से सुन रहे हैं। इसके बावजूद राजधानी के अखबारों में क्राइम की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

दिल्ली में स्कूली बच्चों द्वारा छेड़छाड़ की वरादात के बढ़ रहे मामलों पर रोकथाम के बारे में डीएलएसए के एक अधिकारी का कहना है कि स्कूलों में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग कर सभी को इस खतरे के बारे में अवगत कराना चाहिए।

साभार : इंडियन एक्सप्रेस

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