मोदी के कारण फिर हो रही है हुड्डा की अनदेखी!
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गुड़गांव के निजी स्कूल मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के भाषण को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनाने के लिए निजी स्कूलों ने अपने रूटीन में ही बदलाव कर दिया है।
5 सितंबर को शहर के अधिकतर स्कूल दोपहर 1 बजे से 5 बजे के बीच ही खुलेंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्कूलों के लिए उनका भाषण सुनना अनिवार्य नहीं है, लेकिन सरकारी स्कूलों में अनिवार्यता के तौर पर लिया जा रहा है।
दरअसल, शिक्षक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल के छात्रों व शिक्षकों से एजुसेट के जरिए रूबरू होंगे। इसके लिए सभी स्कूलों को दस बजे से शाम 5 बजे तक का खुले रहने का आदेश दिया गया था। लेकिन, निजी स्कूल इसकी मुखालफत करने लगे हैं।
अधिकतर बड़े स्कूलों ने दोपहर 12 या एक बजे से पांच बजे तक ही स्कूल में कार्यक्रम और प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के लिए छात्रों को डायरी पर सूचना दी है। जबकि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सुबह 11 बजे छात्रों से रूबरू होंगे।
मोदी को सुनने के लिए उतावले हैं स्कूल
पीएम मोदी की हाजिर जवाबी और बोलने की शैली को लेकर स्कूल के शिक्षक भी कायल है। निजी स्कूल के प्रिंसिपल मोदी के संबोधन को सुनने पर उतावले होकर कहते हैं कि आखिर हम भी तो सुने हमारे बारे में क्या कहते हैं? लेकिन, मुख्यमंत्री का भाषण क्यों नहीं सुनना चाहते है? इस पर चुप्पी साध लेते हैं।
इसी तरह बच्चे भी मोदी को सुनने की इच्छा रखते हैं। मुख्यमंत्री के बारे में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा अनिता कहती है कि अभी तक टीवी पर प्रधानमंत्री का भाषण चुनाव पर सुना था, अब हमें क्या कहते हैं? इसे देखना है।
छात्रों के लिए मोदी का भाषण खिताब जीतने का जरिया बनेगा। इसके लिए स्कूलों ने मोदी के भाषण पर प्रतियोगिता भी आयोजित की है। शिक्षक दिवस के अगले दिन भाषण के आधार पर निबंध, वाद-विवाद, कहानी पूरा करो आदि दिया जाएगा।
रेयान इंटरनेशनल स्कूल की मुख्य अध्यापिका रिया शर्मा कहती हैं कि भाषण से ही छात्रों के लिए टॉपिक दिया जाएगा। किसी एक विषय को लेकर छात्रों को निबंध और उससे संबंधित विषय के बारे में कराने का निर्णय लिया गया है।
सुनीता रोहिला, जिला शिक्षा अधिकारी: मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के संबोधन सुनने के लिए सभी स्कूलों को आदेश जारी कर दिया है। उस दिन टीमें भी स्कूलों का दौरा करेगी। अगर कहीं नहीं मिलता है तो इसकी रिपोर्ट बनाकर निदेशालय भेजी जाएगी।