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मनरेगा तोड़ रही है दम, 54 ग्राम पंचायतों में बने 3500 कार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 31 Mar 2016 09:37 AM IST
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मनरेगा मजदूर
- फोटो : Bureau
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना तावडू में दम तोड़ती नजर आ रही है। इस समय मनरेगा योजना के तहत तीन पंचायतों में ही काम हो रहा है। जबकि 54 ग्राम पंचायतों के करीब 3500 जॉबकार्ड बने हुए हैं।
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यह योजना मेवात जिले में पूरी तरह सिरे नहीं चढ़ पाई। जानकारी के अनुसार यह योजना तावडू खंड की 54 ग्राम पंचायतों में से मात्र तीन ही गांव में चल रही है। जिससे साफ अन्दाजा लगाया जा सकता है कि इस योजना का क्या हाल है।
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मनरेगा के बारे में खंड के पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस योजना के तहत मशीनरी का प्रयोग न करना एक प्रमुख कारण है। मजदूर इसलिए भी इस योजना में काम नहीं करना चाहता कि उसे बतौर मजदूरी मात्र 251 रुपये ही दिए जाते हैं।
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जबकि अन्य जगह काम करने के बदले में मजदूर 500 रुपये लेने के साथ बीड़ी माचिस व चाय सहित अपने-आने जाने का किराया भी कार्य करने वाले व्यक्ति से वसूलते हैं।
बता दें कि योजना के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक परिवार को कम से कम 100 दिन की कुशल मजदूरी उपलब्ध कराई जाती है। परिवार का कोई भी सदस्य इस योजना के तहत काम कर सकता है।
काम करने से पहले बेरोजगार व्यक्ति को खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय से जॉबकार्ड बनाकर दिया जाता है। जॉबकार्ड जारी होने के पश्चात 15 दिन के अंदर इच्छुक मजदूर व्यक्ति को काम देना अनिवार्य है।
तावडू के खंड विकास एवं पंचायत अधिकरी अमित कुमार से जब मनरेगा की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बीते वर्ष मनरेगा का वित्तीय बजट 78 लाख था।
जिसे वित्तीय वर्ष 2016-17 में सरकार ने बढ़ाकर 2 करोड़ 50 हजार कर दिया है। क्षेत्र के सरपंचों को इस योजना को गांवों में प्रभावी ढंग से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस समय बेरी, पचगांवा व सूंध तीन पंचायतों में ही मनरेगा का काम जारी है। जल्द ही सभी पंचायतों में काम शुरू कराया जाएगा।