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निगम के पास नहीं है अपनी जमीन का ब्योरा!
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 23 Jan 2014 12:41 PM IST
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गुड़गांव में बीते पांच साल में नगर निगम अपनी ही जमीन को न तो चिन्हित कर पाया है और न उसका ब्यौरा एकत्रित कर पाया। नए निगमायुक्त ने जब अधिकारियों से निगम की जमीन के बारे में पूछा तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था।
निगमायुक्त ने इस पर हैरानी जताते हुए जमीन को चिन्ह्ति कर इसका ब्योरा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2008 में नगर निगम के गठन के बाद करीब 36 गांवों को निगम में शामिल किया गया है। स्वाभाविक तौर पर इन गांवों की पंचायती जमीन और राजस्व निगम के खाते में चला गया।
निगम ने राजस्व को तो हाथोंहाथ अपने खाते में डलवा लिया, लेकिन जमीन को लेकर लापरवाही बरती जा रही थी। इस बीच नगर निगम में पांच सालों में पांच निगमायुक्त बदले गए, लेकिन किसी ने भी इस दिशा में पहल नहीं की। करीब महीने भर पहले निगमायुक्त का पदभार संभालने वाले डॉ. प्रवीण कुमार पदभार संभालने के बाद से ही निगम की जमीन का ब्योरा एकत्रित करने की योजना बना रहे हैं।
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उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में स्पष्ट तौर पर बता भी दिया था। बावजूद इसके उनके आदेशों को लेकर दूसरे निगमायुक्तों की तरह ही गंभीरता नहीं बरती जा रही थी। मंगलवार को उन्होंने इसी मसले पर अधिकारियों की आपात बैठक बुला ली।
बैठक में उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि निगम जमीन की पैमाईश कराकर उसे जल्द से जल्द चिन्ह्ति किया जाए। उन्होंने कहा कि जमीन की तारबंदी करने की बजाय चारदीवारी की जाए, ताकि जमीन पर कब्जा न हो सके। इस कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने बैठक में उपस्थित मैप ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि से कहा कि वे इन जमीनों का पूरा डाटाबेस तैयार करके नक्शे पर भी प्रदर्शित करें। उन्होंने कब्जे वाली जमीन को जल्द से जल्द से कब्जामुक्त कराने की बात भी कही।
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निगमायुक्त ने इस पर हैरानी जताते हुए जमीन को चिन्ह्ति कर इसका ब्योरा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2008 में नगर निगम के गठन के बाद करीब 36 गांवों को निगम में शामिल किया गया है। स्वाभाविक तौर पर इन गांवों की पंचायती जमीन और राजस्व निगम के खाते में चला गया।
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निगम ने राजस्व को तो हाथोंहाथ अपने खाते में डलवा लिया, लेकिन जमीन को लेकर लापरवाही बरती जा रही थी। इस बीच नगर निगम में पांच सालों में पांच निगमायुक्त बदले गए, लेकिन किसी ने भी इस दिशा में पहल नहीं की। करीब महीने भर पहले निगमायुक्त का पदभार संभालने वाले डॉ. प्रवीण कुमार पदभार संभालने के बाद से ही निगम की जमीन का ब्योरा एकत्रित करने की योजना बना रहे हैं।
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उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में स्पष्ट तौर पर बता भी दिया था। बावजूद इसके उनके आदेशों को लेकर दूसरे निगमायुक्तों की तरह ही गंभीरता नहीं बरती जा रही थी। मंगलवार को उन्होंने इसी मसले पर अधिकारियों की आपात बैठक बुला ली।
बैठक में उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि निगम जमीन की पैमाईश कराकर उसे जल्द से जल्द चिन्ह्ति किया जाए। उन्होंने कहा कि जमीन की तारबंदी करने की बजाय चारदीवारी की जाए, ताकि जमीन पर कब्जा न हो सके। इस कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने बैठक में उपस्थित मैप ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि से कहा कि वे इन जमीनों का पूरा डाटाबेस तैयार करके नक्शे पर भी प्रदर्शित करें। उन्होंने कब्जे वाली जमीन को जल्द से जल्द से कब्जामुक्त कराने की बात भी कही।