प्रोफेशन बन रहे शादी में रुकावट
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दिल्ली के एक हालिया केस में डीपीएस के प्रिंसपल की बेटी ने शादी न होने की वजह से आत्महत्या कर ली। पर क्या वाकई ये किसी के आत्महत्या करने का कारण बन सकता है। इसी मुद्दे पर अमर उजाला ने कुछ लोगों से बातचीत कर उनके मन की बात जानी।
दरअसल, मां-बाप के लिए उनकी बेटियां उनका अभिमान होती हैं। बेटी की हर कामयाबी पर उन्हें अपने बेटे से ज्यादा गर्व होता है। हालांकि उन्हें पता है कि बेटियां पराया धन होती हैं, लेकिन उन्हें अच्छी शिक्षा, खान-पान देने में वह कोई कसर नहीं छोड़ते।
लेकिन जब बारी आती है, अपने बेटे के लिए बहू चुनने की तो इन्हीं मां-बाप की सोच बदल जाती है। उन्हें एक सुशील और संस्कारी बहू की तलाश होती है। उन्हें लगता है कि प्रोफेशनल कोर्स और नौकरी करने वाली लड़कियां बहुत तेज होती हैं। पर इसके बावजदू कुछ ऐसे पहलू हैं, जो उनकी राह का रोड़ा बन हुए हैं।
उम्र- 28 साल शिक्षा- एलएलएम, पेशा- वकील
फरीदाबाद की रहने वाली प्रभा ने आपबीती बताते हुए कहा कि उनकी वकालत उनकी शादी में रोड़ा बन रही है।
लड़के वाले शादी के बॉयोडाटा में उनकी शिक्षा और काम करने के अुनभव को देखकर ही मना कर देते हैं। इससे आगे कोई बात करने को तैयार नहीं।
शादी तय करवाने वाले बिचौलिए से ये सुनने को मिलता है कि जी लड़के वालों का कहना हैं कि लड़की वकील है।
घर में कोई छोटी सी बात हो गई तो हमें तो अदालत के चक्कर लगवा देगी। हमें तो ऐसी बहू नहीं चाहिए।
उम्र -26, शिक्षा- मास कम्युनिकेशन, नौकरी- रिपोर्टंर
लेकिन पापा को शादी के लिए लड़का न मिलने पर परेशान देख दुख होता है। लड़के वालों के मन में महिला पत्रकार की गलत छवि बनी हुई है।
टाइमिंग को लेकर थोड़ी परेशानी जरूर होती है, लेकिन उन्हें 10 बजे से 5 बजे तक नौकरी करने वाली बहू चाहिए। मेरे कई रिश्ते टूट चुके हैं।
उसे शादी के लिए अपनी जॉब छोड़ने के लिए कहा जाता है। ऐसे में मन में एक सवाल पैदा होता है कि क्यों पत्रकारिता की। लेकिन वह अपनी जॉब नहीं छोड़ सकती।