नरेंद्र गिरी: आनंद गिरि अस्पताल में ओढ़े रहा खामोशी, एक शब्द नहीं बोला, आद्या ने कहा- मठ में पूछिए मिलेगा जवाब
जब आनंद गिरि से सुसाइड नोट में लगे आरोपों के बाबत पूछा गया तो उसने एक शब्द नहीं बोला। सिर्फ हाथ हिलाकर धीरज रखने का इशारा किया। इसके बाद पुलिस उसे लेकर कोर्ट के लिए रवाना हो गई।
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प्रयागराज में कोर्ट में पेश करने से पहले मेडिकल के लिए लाए जाने के दौरान आनंद गिरि ने खामोशी ओढ़े रखी। अस्पताल में मीडिया के सवाल पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। जब उससे पूछा गया कि कथित सुसाइड नोट को लेकर उसक क्या कहना है, तब भी वह चुपचाप रहा। कोर्ट ले जाने के लिए गाड़ी में बैठाए जाने के दौरान दोबारा सवाल पूछने पर वह एक शब्द नहीं बोला। इस दौरान उसने हाथ हिलाकर सिर्फ धीरज रखने का इशारा किया।
पुलिस लाइन से आनंद गिरि व आद्या तिवारी को करीब 3.30 बजे मेडिकल के लिए बेली अस्पताल ले जाया गया। पुलिस लाइन के मुख्य गेट पर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों का जमावड़ा होने के कारण उन्हें पीछे के गेट से निकाला गया। यहां तक कि बेली अस्पताल के भी दूसरे गेट से उन्हें अस्पताल के भीतर ले जाया गया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने अस्पताल का गेट भी बंद करा दिया।
करीब 15 मिनट बाद मेडिकल परीक्षण के बाद दोनों को कोर्ट ले जाने के लिए अस्पताल कक्ष से बाहर निकालकर गाड़ी में बैठाया गया। इस दौरान जब आनंद गिरि से सुसाइड नोट में लगे आरोपों के बाबत पूछा गया तो उसने एक शब्द नहीं बोला। सिर्फ हाथ हिलाकर धीरज रखने का इशारा किया। इसके बाद पुलिस उसे लेकर कोर्ट के लिए रवाना हो गई।
आद्या बोला, मठ में पूछिए मिलेगा जवाब
उधर आनंद गिरि के ठीक उलट आद्या तिवारी ने मीडिया के सवाल का जवाब दिया। जब उससे कथित सुसाइड नोट में लगे आरोपों के बाबत पूछा गया तो उसने कहा कि इसका जवाब मठ में मिलेगा। पहली बार में उसने जवाब दिया कि इसका जवाब मठ में पूछिए। उधर दूसरी बार में कहा कि मठ में पूछिए, बच्चे बताएंगे। इसके बाद पुलिस उसे लेकर कोर्ट के लिए रवाना हो गई।
वज्र वाहन में ले जाए गए दोनों
आनंद गिरि व आद्या तिवारी दोनों को वज्र वाहन में पुलिस लाइन से कोर्ट ले जाया गया। खास बात यह है कि दोनों को अलग-अलग दो वज्र वाहनों में ले जाया गया। इस दौरान एसओजी की टीमें सुरक्षा में लगाई गई थीं। डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान के नेतृत्व में दोनों आरोपियों को कोर्ट और फिर वहां से नैनी जेल पहुंचाया गया।