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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Mahakumbh: UP will become the biggest center of religious tourism.

Mahakumbh : सुविधाएं बढ़ीं तो करोड़ों में आने लगे तीर्थयात्री, धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा यूपी

Sun, 19 Jan 2025 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक गुप्ता, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 19 Jan 2025 06:25 AM IST
सार

महाकुंभ में श्रद्धालुओं को दी जा रही सुविधाओं का असर है कि इस बार 40 करोड़ से ज्यादा लोग संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे। इन श्रद्धालुओं में 12 करोड़ से ज्यादा ऐसे होंगे, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं। देश-विदेश के उद्योगपतियों का लगातार आगमन और निवास इसी का संकेत है।

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Mahakumbh: UP will become the biggest center of religious tourism.
महाकुंभ नगर संगम तट पर स्नान करते लोग... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुविधाओं के अभाव से पहले कुंभ स्नान दुरुह था। एक वर्ग इच्छा होते हुए भी कुंभ स्नान से वंचित रह जाता था। महाकुंभ में श्रद्धालुओं को दी जा रही सुविधाओं का असर है कि इस बार 40 करोड़ से ज्यादा लोग संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे। इन श्रद्धालुओं में 12 करोड़ से ज्यादा ऐसे होंगे, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं। देश-विदेश के उद्योगपतियों का लगातार आगमन और निवास इसी का संकेत है।

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भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर के प्राध्यापक प्रो. शेखर शुक्ला के अध्ययन के मुताबिक प्रयागराज महाकुंभ केवल 45 दिन ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा। दुनिया में पहली बार ऐसे हुआ है जब किसी मेला या धार्मिक तीर्थाटन को नए नगर का दर्जा दिया गया हो।
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प्रो. शेखर ने बताया कि कुंभ की वजह से बुनियादी सुविधाओं व बुनियादी ढांचे पर खर्च की गई धनराशि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देगा। देश में धार्मिक पर्यटन के सबसे बड़े केंद्र के रूप में यूपी उभरेगा। वैश्विक कंपनी कोहेरेंट मार्केट इनसाइट्स के मुताबिक यहां आध्यात्मिक पर्यटन 15 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है। वर्ष 2030 तक 3200 मिलियन डॉलर का बाजार होगा, जिसमें यूपी की भागीदारी सबसे बड़ी होगी।
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प्रत्येक कुंभ के साथ 100 फीसदी की ग्रोथ
प्रो. शेखर के मुताबिक वर्ष 1977 से वर्ष 2025 तक के महाकुंभ पर आने वाले श्रद्धालुओं का डाटा देखें तो वर्ष 2013 से श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। प्रत्येक कुंभ के साथ इसमें 100 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की जा रही है। वर्ष 2001 में जहां 7 करोड़ श्रद्धालुओं ने कुंभ स्नान किया था, वहीं ये संख्या बढ़कर वर्ष 2019 में 24 करोड़ हो गई। इस बार ये रिकॉर्ड 40 करोड़ से बनेगा। पिछले दस वर्ष में यूपी में हुए तीन कुंभ पर खर्च की गई धनराशि 1,300 करोड़ से बढ़कर 7,500 करोड़ रुपये हो गई है।

इससे साफ है कि यूपी में कुंभ को लेकर दी जा रही सुविधाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यात्रा सुगम और सुविधाजनक होने से कुंभ तक पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 35 देशों की आबादी के बराबर होने का आंकलन है। यूपी में आयोजित कुंभ मेले में बढ़ती गई तीर्थयात्रियों की संख्या...


            वर्ष और संख्या

  • 1977--- 1.5 करोड़
  • 1983-- 1.27 करोड़
  • 1989-- 2.9 करोड़
  • 1995-- 4.95 करोड़
  • 2001-- 7 करोड़
  • 2007-- 7 करोड़
  • 2013-- 12 करोड़
  • 2019-- 24 करोड़
  • 2025-- 40 करोड़ (अनुमानित)

एक वर्ष में कुंभ पर 25 से ज्यादा शोध
प्रो. शेखर मुताबिक कुंभ में शोध कार्यों को लेकर दुनियाभर में रुचि बढ़ती जा रही है। वर्ष 2000 के बाद कुंभ या उससे जुड़े विषयों पर निरंतर शोध चल रहा है। वर्ष 2023-24 में स्कोपस डाटाबेस के अनुसार 25 से ज्यादा शोध कुंभ की थीम पर हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि कुंभ न केवल धार्मिक या आध्यात्मिक उत्सव ही नहीं है बल्कि उसका सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व भी है।

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