लोकसभा चुनाव 2019: दिल्ली के उत्तर-पश्चिम संसदीय क्षेत्र में नए चेहरों से रोचक हुआ मुकाबला
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उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट दिल्ली की इकलौती आरक्षित सीट है, जो 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। तीनों मुख्य दलों ने इस बार नए चेहरों को इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा, कांग्रेस और आप प्रत्याशी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है कि डॉ. उदित राज की जगह भाजपा ने सूफी गायक हंसराज हंस को टिकट दिया है,वहीं आम आदमी पार्टी ने राखी बिड़लान की जगह स्थानीय नेता गुग्गन सिंह को उतारा है।
हंसराज हंस को आप व कांग्रेस से चुनौती मिल रही है। कांग्रेस ने राजेश लिलोठिया और आम आदमी पार्टी ने गुग्गन सिंह को उम्मीदवार बनाया है। एक दूसरे को चुनौती देने से मुकाबला यहां भी त्रिकोणीय है। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव को देखे तो दस विधानसभा सीट में 7 पर भाजपा आगे रही तो तीन विधानसभा क्षेत्रों में आप ने भाजपा से बेहतर प्रदर्शन किया था। मोदी लहर में कांग्रेस पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी। अभी यहां बाहरी बनाम पैराशूट कैंडिडेट प्रचार-प्रसार चल रहा है।
जाट मतदाताओं का रुझान भी अहम है
उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट के मंगोलपुरी, सुल्तान पुरी, नांगलोई और नरेला सीट में दलितों की तादाद अधिक है, वहीं रोहिणी, रिठाला और बादली क्षेत्र में व्यापारी वर्ग की संख्या अधिक है। बाहरी दिल्ली का क्षेत्र जुड़े होने के कारण इस लोकसभा क्षेत्र में जाटों के भी कई गांव आते है। हर चुनाव में जाट मतदाताओं का रुझान भी अहम रहता है।
कहने के लिए राजधानी का हिस्सा है, विकास में पिछड़ा
उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेतर कहने के लिए तो देश की राजधानी का हिस्सा है, लेकिन विकास के मामले में मुख्य दिल्ली से काफी पीछे है। दस में तीन विधानसभा सीेटें भी इसी लोकसभा क्षेत्र में सुरक्षित है। हालत यह है कि इलाका विकास के लिए तरस रहा है। मतदाताओं का भी कहना है कि विकास की बात तो सभी करते है, लेकिन कई इलाकों में मूलभूत सुविधा तक नहीं। सीवर, पानी, बिजली, सड़क समेत कई सुविधाओं से वंचित है यह संसदीय क्षेत्र।
पिछड़े इलाके अधिक हैं
इस लोकसभा क्षेत्र में ज्यादातर इलाके पुनर्वास कॉलोनी व अनधिकृत, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियां है। रोहिणी विधानसभा क्षेत्र ही ऐसा है, जहां विकास दिखाई पड़ता है। ऐसा इसलिए भी है कि इस इलाके को डीडीए ने योजनागत तरीके से निर्माण किया है। वहीं नरेला, बादली, रिठाला, किराड़ी, मंगोलपुरी समेत अन्य विधानसभा की बात करें तो दिल्ली की चकाचौध से काफी पिछड़े हुए हैं।
रोचक है मुकाबला
इलाके की जनता से चर्चा में यह बात उभर कर आई कि यहां रोचक व त्रिकोणीय मुकाबला है। उधर दबी जुबान में कांग्रेस व भाजपा के नेता यह कहते नहीं थक रहे है पार्टी ने बाहरी उम्मीदवार को टिकट दे दिया है। इससे कार्यकर्ता भी असंतुष्ट है। आम आदमी पार्टी ने भी पिछले बार राखी बिड़लान को उतारा था तो इस बार गुग्गन सिंह को मैदान में उतारा है।
2014 का चुनाव: किस विधानसभा क्षेत्र में किस पार्टी का रहा दबदबा
नरेला 69059 52343 14320 16716
बादली 48879 51293 20143 -2414
रिठाला 84596 46959 15294 37637
बवाना 79690 64632 19089 15058
मुंडका 71768 54569 15254 17199
किराड़ी 57107 67377 11593 -10270
सुल्तानपुरमाजरा 29104 60134 13581 -31030
नांगलोई जट 64710 48258 18230 16452
मंगोलपुरी 48971 47449 18540 1522
रोहिणी 73645 29828 11198 43817
चुनाव 2014 में किसे कितने वोट मिले
कुल वोट पड़े 1353181
भाजपा 627529
आप 522842
कांग्रेस 157242
कुल मतदाता- 2343122
पुरूष मतदाता- 1286827
महिला मतदाता- 1056135
थर्ड जेंडर-160
वोट प्रतिशत
एससी-22-25
ब्राह्मण-12-13
वैश्य-10-11
ओबीसी
पंजाबी
सिख
जाट-11-12 प्रतिशत।
पंजाबी-6-7 प्रतिशत।