चुनाव का बिगुल तो बजा लेकिन प्रत्याशी गायब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में लोक सभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 10 अप्रैल को गौतमबुद्ध नगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दस सीटों पर मतदान होना है। लेकिन अभी तक जिन पार्टियों ने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, उनके लिए चुनाव प्रचार में समय की कमी हार का कारण भी बन सकती है।
10 अप्रैल को गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ और बागपत लोक सभा सीट पर मतदान होगा। जिन पार्टियों ने अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं, वहां चर्चा शुरू हो गई है कि समय तो बचा ही नहीं है, अब क्या होगा।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चुनाव के समय मतदाता हर बात को बड़ी ही गंभीरता से लेता है। मसलन, प्रत्याशी वोट ही मांगने नहीं आया है, तो वोट क्यों दूं। ऐसी चर्चाएं चुनावी माहौल में आम होती हैं।
कम समय में होगा ज्यादा काम
चुनाव में हर पार्टी के अपने-अपने प्रचारक होते हैं। अगर प्रचार के दौरान क्षेत्र में बड़ी रैलियां न हुईं, तो भी उसका प्रभाव सीधा वोटरों पर पड़ता है। प्रत्याशी के लिए सिर्फ प्रचार का काम ही नहीं होता है, उसे आला कमान का ख्याल भी रखना होता है।
नामांकन के लिए कागजातों को भी तैयार कराना होता है। ऐसे में सप्ताह भर से ज्यादा का वक्त तो इन्हीं तैयारियों में निकल जाना है। जो प्रत्याशी घोषित किए जा चुके हैं, उन्होंने तो पहले ही क्षेत्र में प्रचार का काम कर लिया है।
सबसे अधिक फायदे में वे रहेंगे, जिन्हें हाईकमान ने चुनाव लड़ने के लिए काफी समय पहले ही कह दिया था। ऐसे प्रत्याशी सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों के जरिए क्षेत्र को वोटर्स के संपर्क में रहे। हाथ जोड़कर वोट भी मांगा और वोटर इस बात से ही खुश हो गया कि प्रत्याशी ने वोट के लिए हाथ जोड़े।