विधानसभा सत्रः उपराज्यपाल ने पेश किया सरकार का विजन
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दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में फैली हिंसा के बीच विधानसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल का अभिभाषण हुआ। इसमें उपराज्यपाल ने दिल्लीवालों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। साथ ही दिल्ली की नई सरकार का विजन भी सदन में पेश किया।
अभिभाषण खत्म करते वक्त उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कहा कि वह विधायकों से व विधायकों की ओर से समस्त नागरिकों से गुजारिश करते हैं कि दिल्ली में शांति, कानून व्यवस्था एवं सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखें और सुरक्षा एजेंसियों को पूरा सहयोग दें।
इससे पहले केजरीवाल सरकार का विजन पेश करते हुए उपराज्यपाल ने आम आदमी पार्टी (आप) की तरफ से दिल्लीवालों को दी गई दस गारंटियों का विस्तार से जिक्र किया। बैजल ने कहा कि विधानसभा चुनाव में मिले जनादेश से साफ है कि दिल्ली की जनता ने उनकी सरकार पर लगातार तीसरे कार्यकाल में यकीन जाहिर किया है। उनकी सरकार संविधान की भावना के अनुसार जनता की सेवा करेगी।
उपराज्यपाल ने वादा किया कि उनकी सरकार नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, मसलन, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर और ध्यान देगी। 200 यूनिट बिजली व 20 किलोलीटर पानी मुफ्त करने के साथ महिलाओं को बसों में मुफ्त सवारी, गुणवत्ता युक्त शिक्षा व शैक्षणिक व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं में सुधार, मोहल्ला क्लीनिक से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, देश में सबसे ज्यादा न्यूनतम मजदूरी देने सरीखी योजनाएं शुरू कीं।
इसके अलावा तीर्थयात्रा व डोर स्टेप डिलीवरी सेवाओं को भी लागू किया। उपराज्यपाल ने कहा कि आगामी कार्यकाल में उनकी सरकार सभी कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने और दिल्ली का विश्वस्तरीय बनाने पर फोकस करेगी।
दस गारंटी पर रहेगा सरकार का जोर
जगमगाती दिल्ली।
. हर घर 24 घंटे नल का जल।
. देश की सबसे अच्छी शिक्षा सुविधा।
. सस्ता, सुलभ और बेहतर इलाज।
. सबसे बड़ी और सस्ती यातायात व्यवस्था
. प्रदूषण मुक्त दिल्ली
. स्वच्छ एवं चमचमाती दिल्ली
. महिलाओं के लिए सुरक्षित दिल्ली
. मूलभूत सुविधा युक्त कच्ची कॉलोनियां
. जहां झुग्गी, वहां मकान।
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़वाने की रहेगी कोशिश
उपराज्यपाल ने कहा कि उनकी सरकार दिल्ली की आर्थिक प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए केंद्रीय करों में अन्य राज्यों की तरह दिल्ली के लिए समान और उचित हिस्सा जरूरी है। 2001 से पहले केंद्रीय करों में दिल्ली के विकास के लिए हिस्सेदारी की व्यवस्था थी। इसे दोबारा शुरू करवाना और दिल्ली नगर निगमों के लिए भी केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता में है।