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Delhi: दिल्ली में हिंसा या मॉब लिंचिंग में मरने वालों को मिलेगा मुआवजा, उपराज्यपाल ने दी मंजूरी

Fri, 29 Dec 2023 03:18 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 29 Dec 2023 03:18 PM IST
सार

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भीड़ हिंसा और लिंचिंग के पीड़ितों के लिए मुआवजे को मंजूरी दे दी है। जो घटना के 30 दिन के अंदर मिल जाएगा। 

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LG approves enabling compensation for victims of mob violence and lynching
v k saxena - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली पीड़ित मुआवजा 2018 योजना में संशोधन को अनुमति दे दी है। राज निवास के अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि भीड़ हिंसा और पीट-पीटकर हत्या के पीड़ितों को अनुग्रह राशि का भुगतान करने में सक्षम बनाया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में राज्य सरकारों को एक महीने के भीतर ऐसी योजना तैयार करने का निर्देश दिया था, लेकिन दिल्ली सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत करने में पांच साल लग गए। योजना में बदलाव के अनुसार, पीड़ित की परिभाषा में संशोधन करके उस व्यक्ति के अभिभावक या कानूनी उत्तराधिकारी को शामिल किया गया है। जिसे भीड़ की हिंसा और मॉब लिंचिंग के परिणामस्वरूप नुकसान या चोट या मृत्यु हुई हो।
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अधिकारी ने कहा कि घटना के 30 दिनों के भीतर पीड़ितों या मृतक के परिजनों को अंतरिम राहत का भुगतान करने का प्रस्ताव किया गया है।  सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई 2018 को निर्देश दिया था कि राज्य सरकारें फैसले के एक महीने के भीतर सीआरपीसी की धारा 357 ए के प्रावधानों के तहत लिंचिंग/भीड़ हिंसा मुआवजा योजना तैयार करेंगी। अदालत ने दिशा निर्देश दिए थे कि मुआवजे की गणना की योजना में राज्य सरकारें शारीरिक चोट, मनोवैज्ञानिक चोट और कमाई के नुकसान का भी ध्यान देंगी।
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बयान में कहा गया कि कमाई के नुकसान के संदर्भ में रोजगार और शिक्षा के अवसरों के नुकसान और मॉब लिंचिंग/भीड़ हिंसा के कारण कानूनी, चिकित्सा और अन्य पीड़ाओं के कारण होने वाले खर्च को भी ध्यान में रखा जाएगा। अधिकारी ने कहा, दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना 2018 को 27 जून 2019 की अधिसूचना में तत्कालीन उपराज्यपाल की मंजूरी के साथ अधिसूचित किया गया था, लेकिन लिंचिंग और भीड़ हिंसा के लिए मुआवजे का मुद्दा इसमें शामिल नहीं था।

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