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विधानसभा की शक्तियों के मसले पर एलजी और अध्यक्ष गोयल आए आमने-सामने
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:25 AM IST
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दिल्ली विधानसभा की शक्तियों के मामले में उपराज्यपाल अनिल बैजल व अध्यक्ष रामनिवास गोयल आमने-सामने हैं। उपराज्यपाल की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष को बताया गया है कि वह जमीन, पुलिस व सेवा विभाग जैसे आरक्षित विषयों से जुड़े विधायकों के सवाल स्वीकार नहीं कर सकते।
जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को व्यवस्था दी कि सदन में दिल्ली के हित से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं और अधिकारियों को जवाब देना होगा। ऐसा न करने पर सभी मामले विशेषाधिकार समिति को सौंप दिए जाएंगे। दिलचस्प यह है कि अमूमन एक-दूसरे से विपरीत राय रखने वाला सत्ता पक्ष व विपक्ष इस मसले पर एक साथ खड़ा दिखा।
दरअसल, सोमवार को प्रश्न काल के दौरान सदन में सवाल किया गया था कि बीते 15 वर्षों में दिल्ली सरकार, नगर निगम और स्वायत्त निकायों के किन-किन अधिकारियों ने कितनी बार विदेश का दौरा किया और इस पर कितना खर्च आया।
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इसका जवाब देने के लिए खड़े हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अभी तक अधिकारियों ने इसका जवाब नहीं दिया है। लेकिन विभागीय स्तर पर यह सवाल पहले वित्त विभाग को भेजा गया। वित्त विभाग ने इसे सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया। फिर इसे सेवा विभाग को भेजा गया।
यह तय नहीं हो सका कि कौन इसका जवाब देगा। इस पर विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक साल पहले अखिलेश पति त्रिपाठी ने भी 20 साल में मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों की विदेश यात्राओं का ब्योरा मांगा था। लेकिन अभी तक इसकी जानकारी सदन को नहीं दी गई है।
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जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को व्यवस्था दी कि सदन में दिल्ली के हित से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं और अधिकारियों को जवाब देना होगा। ऐसा न करने पर सभी मामले विशेषाधिकार समिति को सौंप दिए जाएंगे। दिलचस्प यह है कि अमूमन एक-दूसरे से विपरीत राय रखने वाला सत्ता पक्ष व विपक्ष इस मसले पर एक साथ खड़ा दिखा।
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दरअसल, सोमवार को प्रश्न काल के दौरान सदन में सवाल किया गया था कि बीते 15 वर्षों में दिल्ली सरकार, नगर निगम और स्वायत्त निकायों के किन-किन अधिकारियों ने कितनी बार विदेश का दौरा किया और इस पर कितना खर्च आया।
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इसका जवाब देने के लिए खड़े हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अभी तक अधिकारियों ने इसका जवाब नहीं दिया है। लेकिन विभागीय स्तर पर यह सवाल पहले वित्त विभाग को भेजा गया। वित्त विभाग ने इसे सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया। फिर इसे सेवा विभाग को भेजा गया।
यह तय नहीं हो सका कि कौन इसका जवाब देगा। इस पर विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक साल पहले अखिलेश पति त्रिपाठी ने भी 20 साल में मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों की विदेश यात्राओं का ब्योरा मांगा था। लेकिन अभी तक इसकी जानकारी सदन को नहीं दी गई है।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल भड़क गए। उपराज्यपाल समेत पूरी नौकरशाही को खरी-खरी सुनाते हुए उनके रवैये की तुलना अंग्रेजों के शासन से कर डाली। उन्होंने इसे दिल्ली को परतंत्र करने की साजिश करार दिया। उन्होंने बताया कि बीते 19 मार्च को सतर्कता से जुड़े दो सवालों के जवाब सदन को नहीं दिए गए थे।
स बारे में उपराज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से परामर्श कर एक पत्र भेजा है। इसके मुताबिक, संविधान के तहत विधानसभा अध्यक्ष वैधानिक रूप से किसी आरक्षित विषय पर सवाल स्वीकार नहीं कर सकते।
रामनिवास गोयल के मुताबिक, यह उनके क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया गया है। इस तरह नियमों का हवाला देकर उपराज्यपाल क्या चाहते हैं, दिल्ली में कहीं रेप हो जाए, विधानसभा में सवाल नहीं उठा सकते। ये शर्मनाक विषय है। यह लोकतांत्रिक देश में दिल्ली को परतंत्र करने की साजिश है।
उन्होंने बताया कि विधानसभा प्रक्रिया व कार्य संचालन नियम बताते हैं कि प्रश्न प्रशासन के ऐसे विषय से संबंधित होना चाहिए, जिसके लिए सरकार उत्तरदायी है। उसका प्रयोजन लोक महत्व के विषय में सूचना प्राप्त करना अथवा कार्रवाई का सुझाव देना होगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारियों को समझना होगा कि कानून बनाना और दिल्लीवालों को सीधे प्रभावित करने वाले मसलों का जवाब पाना दोनों अलग-अलग विषय हैं। अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि विधानसभा से स्वीकार किए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए अधिकारी कर्तव्यबद्ध हैं। दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसे सभी सवालों, जिनके जवाब संबंधित विभाग से नहीं मिले, उन्हें विशेषाधिकार समिति को सौंपा जाएगा।
स बारे में उपराज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से परामर्श कर एक पत्र भेजा है। इसके मुताबिक, संविधान के तहत विधानसभा अध्यक्ष वैधानिक रूप से किसी आरक्षित विषय पर सवाल स्वीकार नहीं कर सकते।
रामनिवास गोयल के मुताबिक, यह उनके क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया गया है। इस तरह नियमों का हवाला देकर उपराज्यपाल क्या चाहते हैं, दिल्ली में कहीं रेप हो जाए, विधानसभा में सवाल नहीं उठा सकते। ये शर्मनाक विषय है। यह लोकतांत्रिक देश में दिल्ली को परतंत्र करने की साजिश है।
उन्होंने बताया कि विधानसभा प्रक्रिया व कार्य संचालन नियम बताते हैं कि प्रश्न प्रशासन के ऐसे विषय से संबंधित होना चाहिए, जिसके लिए सरकार उत्तरदायी है। उसका प्रयोजन लोक महत्व के विषय में सूचना प्राप्त करना अथवा कार्रवाई का सुझाव देना होगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारियों को समझना होगा कि कानून बनाना और दिल्लीवालों को सीधे प्रभावित करने वाले मसलों का जवाब पाना दोनों अलग-अलग विषय हैं। अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि विधानसभा से स्वीकार किए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए अधिकारी कर्तव्यबद्ध हैं। दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसे सभी सवालों, जिनके जवाब संबंधित विभाग से नहीं मिले, उन्हें विशेषाधिकार समिति को सौंपा जाएगा।
दिल्ली विधानसभा किसी की बपौती नहीं: सिसोदिया
मनीष सिसोदिया
- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा अध्यक्ष के व्यवस्था देने के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इस मसले में अपनी भड़ास निकाली। सिसोदिया के मुताबिक, संविधान के प्रस्ताव में जो सपना देखा गया है, उस पर बार-बार कील ठोंकने की कोशिश हो रही है। वह अधिकारी कर रहे हों या उपराज्यपाल व केंद्र सरकार, संविधान व लोकतंत्र का अपमान है।
लेकिन जो भी इसे कर रहा है, उसे समझना होगा कि दिल्ली विधानसभा किसी बाबू की कलम की मोहताज नहीं है। विधानसभा किसी की बपौती नहीं। इस तरह की कोशिशें संविधान पर कलंक हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अभी तक डीडीए, पुलिस समेत आरक्षित विभागों से जुड़े सवाल दिल्ली के संबंधित मंत्री के सामने से गुजरते थे। यह पहली बार हुआ है कि बगैर मंत्री को दिखाए जवाब सीधे विधानसभा को भेज दिया गया। यह जांच का विषय है। इस तरह दिल्ली का शासन नहीं चलेगा।
अधिकारियों से कुछ करने को कहो तो उससे बचने के लिए कोई नियम ढूंढ लाते हैं। भले ही उसके लिए पूरा शोध करना पड़े। अधिकारी अगर इतना ध्यान दिल्लीवालों के लिए लगा लेते तो यह नौबत ही नहीं आती। विदेश यात्राओं का जवाब न देकर अधिकारी पुराने पापों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष का भी मिला समर्थन
नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विदेश यात्राओं से जुड़े सवाल सेवा विभाग से जुड़े हुए नहीं हैं। यह सदन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसका जवाब अधिकारियों को देना चाहिए। कानून की पेचीदगी में फंसाकर सवालों से नहीं बचा जा सकता। वहीं, विधायक ओपी शर्मा ने कहा कि सवाल पूछने का अधिकार सभी विधायकों को है। अगर कोई अधिकारी कोताही बरतता है तो उस पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।
लेकिन जो भी इसे कर रहा है, उसे समझना होगा कि दिल्ली विधानसभा किसी बाबू की कलम की मोहताज नहीं है। विधानसभा किसी की बपौती नहीं। इस तरह की कोशिशें संविधान पर कलंक हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अभी तक डीडीए, पुलिस समेत आरक्षित विभागों से जुड़े सवाल दिल्ली के संबंधित मंत्री के सामने से गुजरते थे। यह पहली बार हुआ है कि बगैर मंत्री को दिखाए जवाब सीधे विधानसभा को भेज दिया गया। यह जांच का विषय है। इस तरह दिल्ली का शासन नहीं चलेगा।
अधिकारियों से कुछ करने को कहो तो उससे बचने के लिए कोई नियम ढूंढ लाते हैं। भले ही उसके लिए पूरा शोध करना पड़े। अधिकारी अगर इतना ध्यान दिल्लीवालों के लिए लगा लेते तो यह नौबत ही नहीं आती। विदेश यात्राओं का जवाब न देकर अधिकारी पुराने पापों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष का भी मिला समर्थन
नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विदेश यात्राओं से जुड़े सवाल सेवा विभाग से जुड़े हुए नहीं हैं। यह सदन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसका जवाब अधिकारियों को देना चाहिए। कानून की पेचीदगी में फंसाकर सवालों से नहीं बचा जा सकता। वहीं, विधायक ओपी शर्मा ने कहा कि सवाल पूछने का अधिकार सभी विधायकों को है। अगर कोई अधिकारी कोताही बरतता है तो उस पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।