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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   LDCT screening is effective for the early detection of lung cancer.

Delhi NCR News: फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान में एलडीसीटी स्क्रीनिंग प्रभावी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 05:20 PM IST
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अध्ययन : 17 देशों के 23 वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा का निष्कर्ष, एम्स के विशेषज्ञ भी थे इसमें शामिल
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। फेफड़ों का कैंसर दुनिया में मौतों का एक प्रमुख कारण है। इसकी पहचान अक्सर बीमारी बढ़ने पर होती है, जिससे चुनौती बढ़ जाती है। लो-डोज कंप्यूटेड टोमोग्राफी (एलडीसीटी) स्क्रीनिंग इस समस्या का समाधान बन सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से संबद्ध इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) ने एक शोध किया। इसमें 17 देशों के 23 वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा की। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के विशेषज्ञ भी इसमें शामिल थे। शोध में पाया गया कि उच्च जोखिम वाले लोगों में नियमित एलडीसीटी स्क्रीनिंग फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को घटा सकती है। दुनिया के कई बड़े नैदानिक परीक्षणों और अध्ययनों के प्रमाणों का विश्लेषण किया गया। एलडीसीटी को ऐसी स्क्रीनिंग पद्धति माना गया, जो गंभीर अवस्था के मामलों को कम करती है। सामान्य छाती का एक्सरे शुरुआती पहचान में प्रभावी नहीं रहा। एलडीसीटी फेफड़ों की छोटी गांठों और शुरुआती बदलावों को स्पष्टता से पकड़ता है।
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एलडीसीटी के लाभ और सीमाएं
एलडीसीटी कैंसर के लक्षण गंभीर होने से पहले ही बीमारी की पहचान संभव बनाता है। हालांकि, इसकी स्क्रीनिंग में कुछ गैर-कैंसरयुक्त गांठें भी दिख सकती हैं। इससे अनावश्यक जांच या चिंता की जरूरत पड़ सकती है। वैज्ञानिक समीक्षा में इन संभावित नुकसानों पर भी विचार किया गया है।
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उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए
एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर, विकिरण ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉक्टर और शोधकर्ता अभिषेक शंकर ने बताया कि एलडीसीटी हर व्यक्ति के लिए सामान्य जांच नहीं है। इसका लाभ मुख्य रूप से फेफड़ों के कैंसर के उच्च जोखिम वाले लोगों में है। इनमें 50 से 80 वर्ष के लोग शामिल हैं, जिनका धूम्रपान इतिहास 20 या अधिक पैक-ईयर है। ये वर्तमान में धूम्रपान करने वाले या हाल ही में छोड़ चुके व्यक्ति हो सकते हैं। स्क्रीनिंग का निर्णय उम्र, धूम्रपान इतिहास और अन्य जोखिम कारकों पर चिकित्सकीय सलाह से हो।
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