भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त जज को ये सजा देने पर भड़के वकील, की कड़ी सजा की मांग
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कथित भ्रष्टाचार के आरोप में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को जबरन सेवानिवृति देने पर राजधानी के वकीलों ने नाराजगी जताई है।
उनका तर्क है कि जिला अदालतों में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ऐसे मामलों में लिप्त जजों के खिलाफ कानून के तहत मुकदमा चलाकर दंडित किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने उक्त जज के खिलाफ की गई जांच को सार्वजनिक करने व जजों की भर्ती यूपीएससी के जरिए करने की मांग की है।
सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की समन्वय कमेटी की बैठक में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को सेवा से जबरन रिटायरमेंट देने पर नाराजगी जताई। सभी सदस्यों ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने का यह कोई हल नहीं है।
हाईकोर्ट ने जब उन्हें दोषी पाया है तो आम लोगों के समान ही उक्त जज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए, इससे आम लोगों में न्यायपालिका में विश्वास बढ़ेगा।
'जज को जबरन रिटायरमेंट देकर उन्हें बचाया गया है'
नई दिल्ली बार एसोसिएशन के सचिव नीरज ने कहा कि बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि जज को जबरन रिटायरमेंट देकर उन्हें बचाया गया है। यह सरासर भेदभाव की नीति है और कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। बैठक में मांग की गई कि जजों के खिलाफ भी अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकमदा चलाया जाना चाहिए।
कमेटी ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर उक्त जज के खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। इतना ही नहींकमेटी ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताने के लिए केंद्रीय कानून मंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व अन्य संबंधित विभागों को भी पत्र लिखने का निर्णय किया है।
इसके अलावा उन्होंने नौकरशाहों की भर्ती के समान न्यायिक नियुक्ति आयोग का गठन कर जजों की नियुक्ति भी यूपीएससी के जरिए करने की मांग की है।