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नौकरी का झांसा देने वाली लालू और रामविलास पासवान की कथित महिला रिश्तेदार बरी
Mon, 09 Mar 2020 06:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 09 Mar 2020 06:51 AM IST
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द्वारका कोर्ट ने कथित रूप से लालू प्रसाद यादव और राम विलास पासवान का रिश्तेदार बताकर शख्स की रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देने वाली महिला को बरी कर दिया। इस मामले में 13 साल तक चले मुकदमे के बाद कोर्ट ने शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को गलत ठहराया और शिकायतकर्ता को फटकार भी लगाई।
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अतिरिक्त मुख्य महानगर न्यायाधीश अरुण कुमार गर्ग ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायत कर्ता अचल कश्यप की ओर से महिला रेणुका जयंत पर लगाए गए आरोप में विरोधाभास रहा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि महिला ने रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उससे 1.70 लाख रुपये की डिमांड की थी। उसने 1.05 लाख रुपये दे दिए। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी महिला ने पैसे लेने के बाद न तो नौकरी लगाई और न ही रकम लौटाई।
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कोर्ट ने कहा कि आरोपी महिला को दी गई रकम के आरोप को साबित करने में शिकायतकर्ता विफल रहा। इसके साथ ही उसने फरवरी 2007 में कोर्ट के समक्ष रेणुका जयंत, रजनीश उर्फ मोनू और डॉ बी सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। लेकिन पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में रेणुका जयंत को मुख्य आरोपी बनाया गया, जबकि अन्य दो को मामले में चश्मदीद बनाया गया।
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इसके साथ ही आरोपी महिला पर लगाया गया यह आरोप भी गलत साबित हुआ कि वह लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान की दूर की रिश्तेदार है। लिहाजा कोर्ट आरोपी महिला को सभी आरोपों से मुक्त करती है।