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मरीजों की रक्षा में जुटी बहन ने भाइयों की कलाई पर नहीं बांधी राखी, चार महीने से दो साल का बेटा भी रहता है दूर
Tue, 04 Aug 2020 02:24 PM IST
पूजा त्रिपाठी
आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद
आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 04 Aug 2020 02:24 PM IST
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डॉक्टर ऋचा
- फोटो : अमर उजाला
रक्षा बंधन के त्योहार पर जिस वक्त देश भर में बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध रहीं थीं तब गाजियाबाद के संयुक्त अस्पताल में तैनात डॉक्टर ऋचा त्रिपाठी कोविड़ मरीजों के इलाज में जुटी थीं। रक्षा बंधन के दिन ही डॉक्टर ऋचा ने पंद्रह कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती किए।
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उनके एक भाई गोरखपुर में और दूसरे औरंगाबाद में हैं। भावुक हुईं ऋचा ने कहा कि कोरोना मरीजों का जीवन बचाने की जंग में उन्होंने जो दायित्व निभाया है वह उनके भाइयों के लिए रक्षा सूत्र का ही काम करेगा।
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पैथॉलाजिस्ट डॉ. ऋचा त्रिपाठी गाजियाबाद के संयुक्त अस्पताल में कार्यरत हैं। चार महीने पहले संयुक्त अस्पताल को कोविड लेवल-2 में बदला गया तो अधिकांश महिला डॉक्टरों ने छुट्टी की अर्जी लगा दी, लेकिन डॉ. ऋचा ने मरीजों के इलाज करने की सहमति दे दी। वह शुरू से ही कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने में जुटी हैं।
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डॉ.ऋचा ने बताया कि उनके बड़े भाई गोरखपुर में इंजीनियर हैं जबकि छोटा भाई औरंगाबाद में एमबीबीएस करने के बाद इंटर्नशिप कर रहा है। इस रक्षाबंधन पर दोनों भाइयों से न मुलाकात हुई और न ही राखी बांधने का मौका मिला।
सुबह होटल में क्वारंटीन सेंटर से अस्पताल आने के लिए तैयार हुईं तो एक बार आंखें नम हो गईं कि पहली बार भाइयों को पहली बार राखी नहीं बांध पाई। पर तुरंत मन में भाव आया कि जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचाने का मौका मिल रहा है तो ईश्वर मेरे भाइयों की भी उम्र लंबी करेगा। ऋचा कहती हैं कि वह क्वारंटीन सेंटर में रह रही हैं इसलिए खुद ही फोन करके भाइयों को भी गाजियाबाद आने के लिए मना कर दिया था।
दो साल का बेटा भी रहता है दूर
डॉ.ऋचा कोविड वार्ड में मरीजों का इलाज करते हुए अपने दो साल के बेटे से दूर रहती हैं। उन्होंने बताया कि बेटे और परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए क्वारंटीन सेंटर में रहती हैं। बेटा भी अपने दादा-दादी के पास रहता है। उन्होंने बताया कि दो महीने पहले ससुर की एंजियोप्लास्टी हुई तब भी घर नहीं जा पाई थी। डॉ. ऋचा ने बताया कि तीन अगस्त तक पांच सौ से अधिक मरीजों का इलाज कर चुकी हैं। इनमें अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।अभी अस्पताल में भर्ती 60 मरीजों का इलाज चल रहा है।
दो साल का बेटा भी रहता है दूर
डॉ.ऋचा कोविड वार्ड में मरीजों का इलाज करते हुए अपने दो साल के बेटे से दूर रहती हैं। उन्होंने बताया कि बेटे और परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए क्वारंटीन सेंटर में रहती हैं। बेटा भी अपने दादा-दादी के पास रहता है। उन्होंने बताया कि दो महीने पहले ससुर की एंजियोप्लास्टी हुई तब भी घर नहीं जा पाई थी। डॉ. ऋचा ने बताया कि तीन अगस्त तक पांच सौ से अधिक मरीजों का इलाज कर चुकी हैं। इनमें अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।अभी अस्पताल में भर्ती 60 मरीजों का इलाज चल रहा है।