फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   KMP has hindered the development of Haryana

इसलिए ग्लोबल सिटी का सपना, सपना रह गया

Mon, 06 Jan 2014 05:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 06 Jan 2014 05:55 PM IST
विज्ञापन
KMP has hindered the development of Haryana

विज्ञापन

हरियाणा की तस्वीर बदल देने वाले प्रोजेक्ट के पूरा न होने के पीछे रुकी हुई योजना केएमपी है। इसमें देरी की वजह से हरियाणा के लोगों का ग्लोबल सिटी में रहने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। पहले इसके कॉमनवेल्थ गेम्स तक पूरा करने का लक्ष्य था।  इस डेडलाइन के मिस होने के बाद कई और डेडलाइन तय हुई, पर काम पूरा नहीं हो सका।

गुड़गांव ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उद्यमियों की भी आस केएमपी से जुड़ी है। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो केएमपी के काम को पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। अगर यह काम पूरा हो गया होता तो पूरे हरियाणा की तस्वीर बदल जाती।

विज्ञापन

केएमपी ने किस-किस की रोक रखी राह?

KMP has hindered the development of Haryana

केएमपी की देरी की वजह से कई महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। इनमें 280 हेक्टेयर की लेदर सिटी (तावडू), मेडिकल सिटी (मेवात-गुड़गांव), 220 हेक्टेयर की फैशन सिटी (सोहना), एनएच-8 पर 140 हेक्टेयर की इंटरटेनमेंट सिटी, 750 हेक्टेयर की लेजर सिटी, 260 हेक्टेयर की दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, दिल्ली की आजादपुर की तर्ज पर रिटेल मंडी (एनएच-8) शामिल हैं।

इसके अलावा फाइनेंशियल हब, सॉफ्ट ट्रेडिंग सेंटर, आईटी फैसलिटी, वोकेशनल सेंटर (अपैरल, मैन्यूफैक्चरिंग और फैब्रिक संस्थान), आरएंडडी इंस्टीट्यूशन, राजीव गांधी एजूकेशन सिटी, अर्बन कांप्लेक्स, इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप, कुंडली में फूड पार्क, उद्योग विहार में जेम्स एंड जूलरी पार्क, अप्रैल पार्क एक गुड़गांव में दूसरा बाहरी सोनीपत में और बहादुरगढ़ में फुटवियर एंड लेदर गारमेंट पार्क जैसी योजनाएं भी अपनी बारी आने का इंतजार रही हैं।

क्या है केएमपी?

KMP has hindered the development of Haryana
कुंडली-मानेसर-पलवल यानी केएमपी, एक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना है, जिस पर पांच महीने से काम बंद पड़ा है। इससे शहर के ग्लोबल सिटी बनने का सपना अधर में है। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो केएमपी के काम को पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। अगर यह काम पूरा हो गया होता तो पूरे हरियाणा की तस्वीर बदल जाती।

केएमपी रूट पर विश्वस्तरीय कई प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। 2200 करोड़ रुपये से केएमपी का काम वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। इसका मकसद देश के चार बड़े नेशनल हाइवे को एक साथ जोड़ने का था। पहले इसके कॉमनवेल्थ गेम्स तक पूरा करने का लक्ष्य था। इस डेडलाइन के मिस होने के बाद कई और डेडलाइन तय हुई, पर काम पूरा नहीं हो सका।
विज्ञापन

केएमपी से किस तरह का होगा फायदा?

KMP has hindered the development of Haryana
यूं तो केएमपी के कई फायदे गिनाए जा रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसे फायदे भी हैं, जिनका तुरंत असर दिखने लगेगा। जैसे राज्यों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ जाती, औद्योगिक वाहन बिना शहर प्रवेश किए बाहर-बाहर निकल जाते, चंडीगढ़, पंजाब व अन्य राज्यों में जाने के लिए दिल्ली का रुख नहीं करना पड़ता, ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म हो जाती आदि।

यहीं नहीं अनावश्यक रूप से गुड़गांव के अंदर बाहरी वाहन नहीं घुसते, औद्योगिक माल ढुलाई में तेजी आती, उद्योगों का माल एक स्थान से दूसरी स्थान पर भेजने में खर्च नहीं आता, गुड़गांव, मानेसर, कुंडली, राई, धारूहेड़ा, बावल, भिवाड़ी और रोजकामेव व बहादुरगढ़ के औद्योगिक हब भी आपस में कनेक्ट हो जाते।

केएमपी पर एक नजर

KMP has hindered the development of Haryana

लंबाई 135.6 किलोमीटर, आधिकारिक रूप से इसे वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे कहा जाता है। इसका निर्माण तीन सेक्शन में हो रहा है। हर सेक्शन की लंबाई तकरीबन 45 किलोमीटर है। इसमें चार नेशनल हाइवे हैं (एनएच-1, 2, 8 व 10) हैं।

इसके अलावा 52 अंडर पासेज, 23 ओवर पासेज, 16 अंडर क्रॉसिंग, 33 एग्रीकल्चर वाहनों के लिए अंडरपास, 31 कैटल क्रॉसिंग, 04 रेलवे ओवर ब्रिज, 18 बड़े और छोटे पुल, 292 जल निकासी के स्थान, 2 ट्रक पार्किंग भी बनाई जानी है।

क्या कहते हैं उद्यमी और क्यों रुका काम?

KMP has hindered the development of Haryana
गुड़गांव ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उद्यमियों की भी आस केएमपी से जुड़ी है। आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने बताया कि केएमपी से उद्योगों की समस्याएं तकरीबन पूरी तरह से समाप्त हो जातीं। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव किशन कपूर का कहना है कि एक राज्य से दूसरे राज्यों और जिलों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ जाती।

वहीं डीएस कंस्ट्रक्शन के प्रवक्ता सुनील नायक का कहना है कि काम बंद होने के पीछे आर्थिक कारण हैं। इस प्रोजेक्ट में कुछ नई चीजें शामिल की गई हैं। इससे लागत बढ़ गई है। हरियाणा सरकार से 2200 करोड़ रुपये के अलावा और 900 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। मगर सरकार सिर्फ 500 करोड़ देने को तैयार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed