इसलिए ग्लोबल सिटी का सपना, सपना रह गया
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हरियाणा की तस्वीर बदल देने वाले प्रोजेक्ट के पूरा न होने के पीछे रुकी हुई योजना केएमपी है। इसमें देरी की वजह से हरियाणा के लोगों का ग्लोबल सिटी में रहने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। पहले इसके कॉमनवेल्थ गेम्स तक पूरा करने का लक्ष्य था। इस डेडलाइन के मिस होने के बाद कई और डेडलाइन तय हुई, पर काम पूरा नहीं हो सका।
गुड़गांव ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उद्यमियों की भी आस केएमपी से जुड़ी है। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो केएमपी के काम को पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। अगर यह काम पूरा हो गया होता तो पूरे हरियाणा की तस्वीर बदल जाती।
केएमपी ने किस-किस की रोक रखी राह?
केएमपी की देरी की वजह से कई महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। इनमें 280 हेक्टेयर की लेदर सिटी (तावडू), मेडिकल सिटी (मेवात-गुड़गांव), 220 हेक्टेयर की फैशन सिटी (सोहना), एनएच-8 पर 140 हेक्टेयर की इंटरटेनमेंट सिटी, 750 हेक्टेयर की लेजर सिटी, 260 हेक्टेयर की दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, दिल्ली की आजादपुर की तर्ज पर रिटेल मंडी (एनएच-8) शामिल हैं।
इसके अलावा फाइनेंशियल हब, सॉफ्ट ट्रेडिंग सेंटर, आईटी फैसलिटी, वोकेशनल सेंटर (अपैरल, मैन्यूफैक्चरिंग और फैब्रिक संस्थान), आरएंडडी इंस्टीट्यूशन, राजीव गांधी एजूकेशन सिटी, अर्बन कांप्लेक्स, इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप, कुंडली में फूड पार्क, उद्योग विहार में जेम्स एंड जूलरी पार्क, अप्रैल पार्क एक गुड़गांव में दूसरा बाहरी सोनीपत में और बहादुरगढ़ में फुटवियर एंड लेदर गारमेंट पार्क जैसी योजनाएं भी अपनी बारी आने का इंतजार रही हैं।
क्या है केएमपी?
केएमपी रूट पर विश्वस्तरीय कई प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। 2200 करोड़ रुपये से केएमपी का काम वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। इसका मकसद देश के चार बड़े नेशनल हाइवे को एक साथ जोड़ने का था। पहले इसके कॉमनवेल्थ गेम्स तक पूरा करने का लक्ष्य था। इस डेडलाइन के मिस होने के बाद कई और डेडलाइन तय हुई, पर काम पूरा नहीं हो सका।
केएमपी से किस तरह का होगा फायदा?
यहीं नहीं अनावश्यक रूप से गुड़गांव के अंदर बाहरी वाहन नहीं घुसते, औद्योगिक माल ढुलाई में तेजी आती, उद्योगों का माल एक स्थान से दूसरी स्थान पर भेजने में खर्च नहीं आता, गुड़गांव, मानेसर, कुंडली, राई, धारूहेड़ा, बावल, भिवाड़ी और रोजकामेव व बहादुरगढ़ के औद्योगिक हब भी आपस में कनेक्ट हो जाते।
केएमपी पर एक नजर
लंबाई 135.6 किलोमीटर, आधिकारिक रूप से इसे वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे कहा जाता है। इसका निर्माण तीन सेक्शन में हो रहा है। हर सेक्शन की लंबाई तकरीबन 45 किलोमीटर है। इसमें चार नेशनल हाइवे हैं (एनएच-1, 2, 8 व 10) हैं।
इसके अलावा 52 अंडर पासेज, 23 ओवर पासेज, 16 अंडर क्रॉसिंग, 33 एग्रीकल्चर वाहनों के लिए अंडरपास, 31 कैटल क्रॉसिंग, 04 रेलवे ओवर ब्रिज, 18 बड़े और छोटे पुल, 292 जल निकासी के स्थान, 2 ट्रक पार्किंग भी बनाई जानी है।
क्या कहते हैं उद्यमी और क्यों रुका काम?
वहीं डीएस कंस्ट्रक्शन के प्रवक्ता सुनील नायक का कहना है कि काम बंद होने के पीछे आर्थिक कारण हैं। इस प्रोजेक्ट में कुछ नई चीजें शामिल की गई हैं। इससे लागत बढ़ गई है। हरियाणा सरकार से 2200 करोड़ रुपये के अलावा और 900 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। मगर सरकार सिर्फ 500 करोड़ देने को तैयार है।