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फजीहत से बचने के लिए तो नहीं मंत्री की बर्खास्तगी!

Sat, 10 Oct 2015 04:03 PM IST
Updated Sat, 10 Oct 2015 04:03 PM IST
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kejriwal trying to avoid embarrassment

पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर, इससे पूर्व के कानून मंत्री सोमनाथ भारती व कोंडली के विधायक मनोज कुमार की संगीन आरोपों में गिरफ्तारी तक चुप्पी साधे रही ‘आप’ सरकार इस बार पूरी तरह से सचेत दिखी।

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भ्रष्टाचार दूर करने के आंदोलन से जन्म लेने वाली आप आदमी पार्टी (आप) के केबिनेट मंत्री का भ्रष्टाचार अगर किसी अन्य मंच से उठता तो इस बार पार्टी को बड़ी फजीहत झेलनी पड़ती।
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ऐसे में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इससे बचने के लिए या भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीतिक मिसाल बनने के लिए यह कदम उठाया, इस पर जनता व सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। बिहार सहित आगामी चुनावों में इस फैसले के नफा-नुकसान का आकलन कर सियासी दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू भी हो चुका है।
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निर्णय के लिए दिग्गजों में हुआ रातभर मंथन

kejriwal trying to avoid embarrassment

पार्टी सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ सप्ताह से आसिम का रुपये मांगने का यह टेप चर्चा में था और विपक्षी दल के नेता सत्यता जांच कर मामला उठाने की कोशिश में जुटे थे। जैसे ही मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह मामला बृहस्पतिवार को रातभर इस पर निर्णय लेने के लिए आप के दिग्गज नेताओं ने मंथन किया और इस पर फैसला लेने में जरा भी देरी नहीं की।


भ्रष्टाचार देश में बड़ा मुद्दा है और इस वजह से ही आम आदमी पार्टी दिल्ली की गद्दी पर आसीन हुई थी। लेकिन पूर्व के मंत्रियों के फर्जी डिग्री, पत्नी पर जानलेवा हमला, फर्जीवाड़ा आदि मामलों में चुप्पी साधे बैठी रही आम आदमी पार्टी की काफी फजीहत भी हुई थी।

इसलिए इस मामले में आप सरकार पूरी तरह सचेत रही। केजरीवाल ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर एक मिसाल भी कायम कर दी। मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने मंत्री के खिलाफ ऑडियो टेप मीडिया को सुनाया और उसे मंत्री पद से हटा दिया।

पार्टी का मानना मंत्री को हटाना मिसाल बनेगा

kejriwal trying to avoid embarrassment

पार्टी का मानना है कि लोकपाल के गठन में देरी व पूर्व में हुई फजीहत के चलते मंत्री को हटाने का फैसला एक बड़ी मिसाल बनेगा और उन्हें आगामी बिहार, पंजाब विधानसभा सहित अन्य चुनावों में कांग्रेस, भाजपा व अन्य दलों को दागी नेताओं के मुद्दे पर घेरने का मौका मिलेगा।

मालूम हो कि काफी समय से केंद्र के मंत्रियों व मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन तमाम हो-हल्ले के बाद भी इन नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी ओर भाजपा व कांग्रेस भी आसिम पर मुकदमा दर्ज न कराने व उन्हें हटाने के अलावा कोई और रास्ता न होने, लोकपाल व अन्य मामलों में समय पर कदम न उठाने पर सरकार को घेरने में जुट गई है। आने वाले समय में इसका फायदा किसे मिलेगा यह देखने की बात होगी।

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