केजरीवाल के रडार में आए AAP के बड़े नेता
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दिल्ली में चुनाव बेशक अभी दूर हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी (आम) के पदाधिकारी संयोजक अरविंद केजरीवाल के रडार पर हैं। सभी पदाधिकारियों को केजरीवाल के सामने साप्ताहिक बही-खाता पेश करना पड़ रहा है।
इसमें न सिर्फ पुराने काम की समीक्षा होती है, बल्कि आगे का लक्ष्य भी दिया जाता है। माना जा रहा है कि पूरी कवायद पार्टी को अलर्ट मोड पर रखने की है।
लोकसभा चुनाव में पटखनी खाने के बाद आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने अरविंद केजरीवाल पर दिल्ली की जिम्मेदारी डाल दी थी। उसके बाद केजरीवाल ने पार्टी की दिल्ली इकाई का पुनर्गठन किया था। इस कड़ी में पूरी दिल्ली को 14 हिस्सों में बांटकर पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे।
हर पर्यवेक्षक पर पांच-पांच विधानसभाओं की जिम्मेदारी डाली गई। इसी बीच पार्टी की महिला और यूथ इकाई का भी गठन किया गया।
साप्ताहिक बैठकों का सिलसिला शुरू
पूरा ढांचा तैयार होने के बाद केजरीवाल ने साप्ताहिक बैठकों का सिलसिला शुरू किया है। सप्ताह में एक दिन प्रदेश इकाई, यूथ और महिला विंग के पदाधिकारी और 14 पर्यवेक्षकों के साथ केजरीवाल की अलग-अलग बैठकें होती हैं।
पार्टी के एक पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि सबसे पहले पिछले हफ्ते की गतिविधियों पर चर्चा होती है। इस दौरान कार्यों के क्रियान्वयन में आने वाली अड़चन पर भी गौर किया जाता है। साथ ही व्यक्ति विशेष की क्षमता भी परखी जाती है। इसके आधार पर संबंधित इकाई का अगले हफ्ते का लक्ष्य तय होता है।
इसके साथ पिछले दो महीने में एक बार दिल्ली के सभी विधायकों/प्रत्याशियों और विधानसभा स्तर पर तैनात पर्यवेक्षकों के साथ भी केजरीवाल ने बैठक की है। इसमें स्थानीय स्तर पर पार्टी की जमीन मजबूत करने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा केजरीवाल खुद भी सप्ताह में औसतन पांच सभाएं कर रहे हैं। इस दौरान वह अपनी 49 दिनों की सरकार के कामों का ब्योरा देते हैं। वहीं, इस्तीफे पर माफी मांगकर आम लोगों की नाराजगी भी दूर करने की कोशिश करते हैं।