केजरीवाल का बाबुओं को आदेश, LG की मत सुनो
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केजरीवाल के उस आदेश पर काफी बवाल मच गया है जिसमें उन्होंने कहा है कि कोई भी अधिकारी एलजी से मिले आदेश को सीधे ना मानें। यानी पहले इसकी सूचना संबंधित मंत्री या मुख्यमंत्री को दी जाए और उनकी सलाह के बाद ही उस आदेश को माना जाए।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील राजीव धवन ने दिल्ली सरकार के कहने पर अपना वैधानिक मत सामने रखा है। कानूनी रूप से इस मामले में क्या होना चाहिए उस बारे में धवन ने बताया है।
धवन ने शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य(1974, 2 SCC 831) केस का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह पीएम और सीएम के सलाह पर राष्ट्रपति और गवर्नर काम करते हैं वहीं बात एलजी पर भी लागू होती है।
केजरीवाल ने संविधान के नियमों का दिया हवाला
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल का आदेश अधिकारियों को न मानने की हिदायत दी है। मुख्यमंत्री ने एक आदेश जारी कर कहा है कि संविधान, एनसीटी एक्ट व कार्य संपादन प्रक्रिया (टीबीआर) का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है।
कार्य संपादन प्रक्रिया के नियम 4 में साफ कहा गया है कि मंत्री विभाग के संबंधित कार्य कराने के लिए उत्तरदायी है। आदेश में कहा गया है कि उपराज्यपाल या उनके कार्यालय से कोई लिखित या मौखिक आदेश मिले तो पहले मंत्री और मुख्यमंत्री को फैसला लेने के लिए भेजें।
उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ से आए किसी आदेश पर मुख्य सचिव या सचिव मुख्यमंत्री या मंत्री की तरफ से लिखित आदेश मिलने तक कोई आदेश जारी न करें। संबंधित सचिव टीबीआर नियम 57 का अध्ययन जरूर करें। इस आदेश का पालन किया जाए।
अधिकारियों का स्थानांतरण भी हो सकता है
टीबीआर के चैप्टर 4 व 5 का जिक्र करते हुए बताया गया है कि कैबिनेट और उपराज्यपाल के बीच मतभेद की स्थिति में उसका पालन करें।
किसी भी मामले में कैबिनेट मंत्रियों को बाईपास करके आदेश नहीं दिए जा सकते। मुख्यमंत्री ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि दैनिक कार्य के लिए संविधान, एनसीटी एक्ट व टीबीआर का ध्यान रखें।
वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की स्थानांतरण नीति में बदलाव की सूचना भी मिल रही है। हालांकि इस मामले की पुष्टि नहीं हुई है।
टीम योगेंद्र ने किया मुख्यमंत्री का समर्थन
योगेंद्र यादव और उनके सहयोगियों के स्वराज अभियान ने मौजूदा सियासी विवाद में मुख्यमंत्री का समर्थन किया है। उनका मानना है कि उपराज्यपाल को जनता द्वारा चुनी गई सरकार को विश्वास में लेकर ही किसी तरह की नियुक्ति करनी चाहिए।
एक साल से उपराज्यपाल केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के प्रतिनिधि की तरह काम कर रहे हैं। केजरीवाल के पूर्व सहयोगियों ने कहा है कि कार्यकारी मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की नियुक्ति के लिए उपराज्यपाल को मुख्यमंत्री की सलाह माननी चाहिए।