6 बार पूर्ण राज्य बनते-बनते रह गई दिल्ली

अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Jan 2014 03:40 PM IST
Kejriwal gov tries to make statehood to Delhi
आम आदमी पार्टी बेशक केंद्र से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन करने की मांग कर रही हो, लेकिन जनता से किए गए ये वादे केजरीवाल सरकार के लिए पूरा करना अभी कतई संभव नहीं है। स्टेटस बदलने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत से संविधान संशोधन पारित करना होगा।

यह तभी संभव है, जब केंद्र में राजनीतिक सहमति हो। बहरहाल, इन मांगों पर कांग्रेस और भाजपा जुदा राय रखती हैं। दुनिया की सबसे बड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस (दिल्ली पुलिस) को दिल्ली सरकार के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए संविधान संशोधन इसलिए जरूरी है, क्योंकि संविधान की अनुच्छेद 239एए के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का गठन किया गया था।

अनुच्छेद 239एए में स्पष्ट है कि जमीन, पब्लिक ऑर्डर व पुलिस को छोड़कर उसकी बाकी शक्तियां अन्य राज्यों की सरकारों की तरह होगी। ऐसे में पूर्ण राज्य का दर्जा और पुलिस को राज्य सरकार के अधीन करने के लिए संविधान संशोधन जरूरी है। फिलहाल ऐसा करने में न तो कांग्रेस की रुचि है और न ही भारतीय जनता पार्टी की।

1991 में संविधान के 69वें संशोधन के जरिए दिल्ली को आंशिक राज्य का दर्जा दिया गया था। उसके बाद 2003 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी ने लोकसभा में प्रस्ताव पेश कर दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोतरी की कोशिश की थी। तब उन्होंने भी पुलिस और पब्लिक आर्डर को केंद्र के ही हाथ में रखने का मसौदा तैयार किया था, लेकिन लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के चलते वह बिल पास नहीं हो सका।

इस बीच कानून व्यवस्था में दिक्कत होने पर दिल्ली विधानसभा में पुलिस आयुक्त को कई बार बुलाया जा चुका है, लेकिन पुलिस अधीन नहीं हो सकी। दिल्ली के उपराज्यपाल के पूर्व प्रधान सचिव आर चंद्रमोहन कहते हैं कि दिल्ली पुलिस को राज्य सरकार के अधीन लाने के कई प्रयास पहले किए गए हैं, लेकिन केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण कार्यालय, दूतावास, संसद भवन संवेदनशील भवन होने के कारण पुलिस राज्य सरकार को देने में केंद्र सरकार हाथ खींचती है।

दिल्ली पुलिस के अधिनियम में बदलाव करके सीआरपीसी की शक्तियां पुलिस आयुक्त को देने की बजाय डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को देनी होगी। वाशिंगटन डीसी और पेरिस की पुलिस भी संघीय और केंद्र सरकार के अधीन है।

कब-कब पास हुआ पूर्ण राज्य वाला प्रस्ताव?
29 अक्तूबर, 1953 में विधानसभा
12 मई, 1954 विधानसभा
11 नवंबर, 1983 में मेट्रोपोलिटन काउंसिल
3 जून, 1988 में मेट्रोपोलिटन काउंसिल
26 अगस्त, 1994 में विधानसभा
11 सितंबर, 2002 में विधानसभा

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