केजरीवाल का अपने गुरु अन्ना पर वार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अन्ना हजारे के बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को समर्थन करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने पहली बार इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी। केजरीवाल ने सत्ता का भूखा होने के अन्ना के आरोप को नकार दिया।
उन्होंने कहा कि अन्ना की इस तरह की बातों से दुख होता है। उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर अन्ना की तरफ से लिखी गई चिट्ठी का जवाब देने की बात भी कही।
केजरीवाल ने ये बातें बुधवार शाम सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की तरफ से आयोजित लीडर-2014 लाइव टॉक में कहीं।
ममता से पहले हमने उन मुद्दों किया था समर्थन
ममता बनर्जी को समर्थन देते समय अन्ना हजारे ने दावा किया था कि ममता ही ऐसी इकलौती नेता हैं, जिन्होंने सुशासन के 17 मुद्दों पर समर्थन से जुड़े उनके पत्र का जवाब दिया। यहां तक कि केजरीवाल ने भी इसका जवाब नहीं दिया था।
इस बारे में केजरीवाल ने सफाई दी कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उनकी अन्ना से मुलाकात हुई थी, तब अन्ना ने उन्हें कागज का एक पर्ची दी थी। इसमें 17 मुद्दों का जिक्र था। उसे देखते ही उन्होंने सहमति दे दी थी, लेकिन अन्ना ने उनसे राजनीतिक मामलों की समिति में चर्चा करने का आदेश दिया।
इस पर उन्होंने नेताओं से चर्चा की और एक दिन बाद दुबारा मुद्दों पर सहमति जाहिर कर दी थी। वहीं, सत्ता के भूखे होने के अन्ना के आरोप पर केजरीवाल ने कहा कि वह सत्ता के भूखे नहीं हैं।
कश्मीर से सेना हटानी चाहिए
जम्मू-कश्मीर में सेना की तैनाती पर केजरीवाल का मानना है कि सिर्फ जमीन का टुकड़ा ही नहीं, वहां के लोग भी देश का हिस्सा हैं। हमें कश्मीरियों का दिल जीतना जरूरी है और यह काम डंडे-बंदूक के बल पर संभव नहीं है।
जिस दिन हम ऐसा करने में कामयाब रहे, कश्मीर समस्या ही नहीं रहेगी। उन्होंने साफ किया सेना की तैनाती ज्यादा दिन नहीं होनी चाहिए। इससे दूसरी दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में जनमत संग्रह की बात से इंकार किया।
धारा 370 के बारे में केजरीवाल की राय है कि इसे जारी रखना चाहिए, लेकिन अगर किसी समुदाय के सिविल कोड का टकराव मूलाधिकारों से होता है तो टकराव की सीमा तक सिविल कोड में बदलाव करना जरूरी है।
एक परिवार को एक बार मिले आरक्षण
आरक्षण के मसले पर केजरीवाल का मानना है कि यह सब कुछ नहीं है। हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा कि एक परिवार को इसका फायदा एक ही बार मिले। अगली बार इसे दूसरे जरूरतमंद को दिया जाए।
जब रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं तो आरक्षण बड़ी तादात में दबे-कुचले लोगों की बेहतरी का इकलौता जरिया नहीं हो सकता। इसके लिए शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव जरूरी है।
केजरीवाल ने कहा कि इन्हीं मुद्दे पर देश बदलने के लिए उन्होंने सियासत में कदम रखा है। दो लोगों के बीच राय अलग हो सकती है, लेकिन अन्ना की इस तरह की बातों से उन्हें दुख होता है।