छोटे भाई काशीनाथ सिंह ने बताया था नामवर सिंह की लंबी उम्र का पहला राज
पिछले साल 28 जुलाई को जब नामवर सिंह 92 साल के हो गए तो लेखक और उनके छोटे भाई काशीनाथ सिंह कहा था कि नामवरजी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का पहला राज है उनका पढ़ना और लिखना। जब तक वह पढ़ सकते हैं, तब तक वे स्वस्थ रहेंगे।
काशीनाथ ने कहा, उनके स्वास्थ्य का दूसरा बड़ा राज है, विरोध सुनते रहना। विरोध से वह ताकत पाते हैं। उन्हें लोकप्रियता पसंद है। लोकप्रियता पर बने रहना पसंद है। यह केवल अध्यापन करते हुए संभव नहीं था। आलोचकों में भी ऐसी लोकप्रियता किसी को नहीं मिली, जैसी नामवरजी को मिली है।
नामवर ने आलोचना और साक्षात्कार विधा को दी नई पहचान
नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई पहचान ही नहीं बल्कि नई ऊंचाई भी दी। साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त नामवर का जन्म चंदौली जिले के जीयनपुर में हुआ था। काशी विश्वविद्यालय से साहित्य में एमए और पीएचडी करने के बाद वहीं कई साल तक प्रोफेसर रहे। आलोचना में उनकी किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद आदि मशहूर हैं।
उनका साक्षात्कार ‘कहना न होगा’ भी साहित्य जगत में लोकप्रिय है। इसके अलावा उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें भी चर्चित हैं। नामवर सिंह ने सागर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन कार्य किया, लेकिन सबसे लंबे समय तक वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहे। यहां से रिटायर होने के बाद वह एमिरिटेस प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाते रहे।