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चुनाव के झरोखे से: चंदे के सहारे चुनाव जीते थे कन्हैयालाल
Mon, 18 Mar 2019 03:38 AM IST
vivek shukla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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Published by: vivek shukla
Updated Mon, 18 Mar 2019 03:38 AM IST
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के.एल. बाल्मीकि (File)
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खुर्जा (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर 1952 में प्रथम लोकसभा चुनाव जीतने वाले कन्हैयालाल वाल्मीकि ने चंदे के सहारे ही चुनाव जीत लिया था। इसमें उन्हें मात्र कुछ सौ रुपये खर्च करने पड़े थे।
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पंजाब के एक गरीब परिवार से संबंध रखने वाले कन्हैयालाल वाल्मीकि के लिए यह संसदीय क्षेत्र एकदम नया था। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन में इसका नाम खुर्जा से बदलकर गौतमबुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र हो गया। नई व्यवस्था के तहत इसे सामान्य श्रेणी में शामिल कर लिया गया है।
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सुरक्षित सीट पर कन्हैयालाल 1952, 1957 और 1962 में तीन बार सांसद रहे। 1967 में भी वे कांग्रेस प्रत्याशी रहे, लेकिन प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामचरन दास से पराजित हो गए थे। अपने कार्यकाल में उन्हें जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी का साथ मिला।
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1967 से प्रत्याशियों का चुनावी खर्च बढ़ने लगा था। इसे लेकर कन्हैयालाल वाल्मीकि खिन्न थे। आर्य प्रतिनिधि सभा के जिला उपाध्यक्ष डॉ. आनंद आर्य ने बताया कि वे उस दौरान कहते थे कि अब पुराना दौर खत्म हो चला है।
राजनीतिक दलों और नेताओं के स्वरूप में भी परिवर्तन आ गया है। प्रथम चुनाव के वक्त पार्टी प्रत्याशी को बुलाकर खुद टिकट देती थी। व्यक्तिगत खर्च के बजाय पार्टी पोस्टर और झंडे खुद भिजवाती थी।
प्रचार का जिम्मा तब समर्पित कार्यकर्ता खुद संभाल लेते थे। क्षेत्र में चुनाव लड़ाने के लिए समर्थक चंदा जुटाते थे। तब का संसदीय चुनाव कुछ सौ रुपये में ही लड़ा जाता था।