{"_id":"177307eb1362cea82f1f6ebebe92d30d","slug":"kalyan-hit-maya-fail","type":"story","status":"publish","title_hn":"कल्याण को कामयाबी, माया को मिली थी मायूसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कल्याण को कामयाबी, माया को मिली थी मायूसी
शादाब रिज़वी/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Thu, 13 Mar 2014 09:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वेस्ट यूपी का चर्चित बुलंदशहर लोकसभा क्षेत्र दिग्गजों की पसंद रहा है। यह सीट माननीयों को खट्टे-मीठे अनुभव कराती रही है।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह यहां से कामयाब होकर देश की सबसे बड़ी पंचायत पहुंचे। बसपा मुखिया मायावती को मायूसी हाथ लगी।
केंद्रीय मंत्री डाक्टर छत्रपाल सिंह ने तीन बार यहां से संसद में नुमाइंदगी की। पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को जीत नसीब नहीं हो सकी। केंद्रीय मंत्री सरवर हुसैन खां और यूपी के पूर्व सीएम बनारसी दास भी यहां से संसद का सफर तय कर चुके हैं।
कल्याण का करिश्मा..
पूर्व सीएम और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कल्याण सिंह का गढ़ माने वाली इस सीट पर उन्हें खुद और उनके पसंद के उम्मीदवार को जरूर कामयाबी मिली।
2004 में कल्याण सिंह ने रालोद-सपा समर्थित बदरुल इस्लाम को हराया। 2009 में सीट रिजर्व होने के कारण भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को मैदान में उतारा।
कल्याण सिंह को अशोक प्रधान पसंद नहीं थे। भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी। नाराज कल्याण सिंह ने भाजपा को बाय-बाय कह दिया।
सपा के साथ मिलकर नए चेहरे कमलेश बाल्मीकि को मैदान में उतारकर अशोक प्रधान को पटखनी दिला दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री छत्रपाल सिंह ने यहां से भाजपा के टिकट पर तीन बार 1991, 1996, 1998 में जीत दर्ज की। ।
विज्ञापन
बसपा का फ्लॉप शो..
बसपा मुखिया मायावती ने 1991 में इस लोकसभा सीट पर किस्मत आजमाई। उनका सामना यहां भाजपा, सपा और कांग्रेस के दिग्गजों से हुआ। बसपा प्रमुख पूर्व सीएम बहनजी की जादू इस सीट पर नहीं चला। वह चौथे नंबर पर रही। हार के बाद मायावती ने कभी इस सीट पर किस्मत नहीं आजमाई।
विज्ञापन
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह यहां से कामयाब होकर देश की सबसे बड़ी पंचायत पहुंचे। बसपा मुखिया मायावती को मायूसी हाथ लगी।
केंद्रीय मंत्री डाक्टर छत्रपाल सिंह ने तीन बार यहां से संसद में नुमाइंदगी की। पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को जीत नसीब नहीं हो सकी। केंद्रीय मंत्री सरवर हुसैन खां और यूपी के पूर्व सीएम बनारसी दास भी यहां से संसद का सफर तय कर चुके हैं।
कल्याण का करिश्मा..
पूर्व सीएम और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कल्याण सिंह का गढ़ माने वाली इस सीट पर उन्हें खुद और उनके पसंद के उम्मीदवार को जरूर कामयाबी मिली।
2004 में कल्याण सिंह ने रालोद-सपा समर्थित बदरुल इस्लाम को हराया। 2009 में सीट रिजर्व होने के कारण भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को मैदान में उतारा।
विज्ञापन
कल्याण सिंह को अशोक प्रधान पसंद नहीं थे। भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी। नाराज कल्याण सिंह ने भाजपा को बाय-बाय कह दिया।
सपा के साथ मिलकर नए चेहरे कमलेश बाल्मीकि को मैदान में उतारकर अशोक प्रधान को पटखनी दिला दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री छत्रपाल सिंह ने यहां से भाजपा के टिकट पर तीन बार 1991, 1996, 1998 में जीत दर्ज की। ।
विज्ञापन
बसपा का फ्लॉप शो..
बसपा मुखिया मायावती ने 1991 में इस लोकसभा सीट पर किस्मत आजमाई। उनका सामना यहां भाजपा, सपा और कांग्रेस के दिग्गजों से हुआ। बसपा प्रमुख पूर्व सीएम बहनजी की जादू इस सीट पर नहीं चला। वह चौथे नंबर पर रही। हार के बाद मायावती ने कभी इस सीट पर किस्मत नहीं आजमाई।