13 जनवरी को किसान संकल्प दिवस के रूप में मनाएंगे अन्नदाता, अब हर दिन होगा खास
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किसानों ने कहा है कि अब वह हर दिन को खास दिन के रूप में मनाएंगे। इस दौरान 13 जनवरी को किसान संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाएगा। सोमवार को टीकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में इस बात की जानकारी दी गई।
किसानों ने कहा है कि 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर परेड की तैयारियां तेज हो गई है। ऐसे में प्रत्येक दिन को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। 13 जनवरी को किसान संकल्प दिवस के अलावा 18 जनवरी को किसान महिला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। जबकि 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस के अवसर पर किसान ट्रैक्टर परेड की तैयारियों को अंतिम रूप देंगे। इसके बाद 26 जनवरी को पूरी शक्ति के साथ कर्सान दिल्ली में प्रवेश करेंगे।
प्रेस वार्ता में परनाद बारूखेड़ा, जोगेंद्र घासीराम नैन, विकास सिसर और अनूप चैनत शामिल थे। जोगेंद्र घासीराम नैन ने कहा कि हरियाणा के हर गांव से पांच ट्रैक्टर परेड में शामिल होंगे। ट्रैक्टर रैली की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि रविवार को करनाल में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की रैली में उपद्रव और किसानों पर हुई पुलिस कार्रवाई बेहद शर्मनाक थी। उन्होंने कहा कि लोगों को शांति से काम लेना चाहिये। साथ ही उन्होंने पुलिस की ओर से किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की कार्रवाई को भी गलत बताया।
किसान आंदोलन को लगातार मिल रहा जनसमर्थन
किसान आंदोलन को लगातार भारी जनसमर्थन मिल रहा है। पिछले तीन दिन से टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर पहले की अपेक्षा लोगों का आना बढ़ गया है। यहां पर पहले से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के लोग आकर किसानों का समर्थन कर रहे थे। अब देश के विभिन्न राज्यों से भी लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
टीकरी बॉर्डर पर शनिवार से भारी भीड़ जुट रही है और लगभग ऐसा ही हाल सिंघु बॉर्डर का भी है। मौजूदा समय यहां के हालात ऐसे हैं कि दिन में सड़क पर खड़े ट्रैक्टरों के बाद बचे रास्ते पर से पैदल चलना मुश्किल है। इसके अलावा यहां पर ट्रैक्टरों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। दिनभर दोनों आंदोलन स्थलों की सड़कों पर ट्रैक्टरों की आवाजाही जारी है।
सोमवार को अच्छी धूप निकली इसलिए भी यहां अधिक संख्या में लोग पहुंचे थे। एक तरफ सरकार के साथ लगातार बातचीत असफल होने के कारण किसानों का सरकार को लेकर अविश्वास बढ़ गया है। इसका असर मंच पर साफ नजर आ रहा है। किसानों के समर्थन में आने वाले लोग सुबह से शाम तक एक एक कर अपनी बात रखते हैं। इस दौरान सरकार को नसीहत दी जाती है। सरकार को अपने फैसले को वापस लेने के लिए आह्वान किया जाता है।
सरकार को कृषि कानून वापस नहीं लेने पर भुगतने की चुनौती भी दी जाती है। लोग अपने वक्तव्यों के माध्यम से किसानों के हक की बात करते हैं। इन सब के बावजूद 15 जनवरी को किसान सरकार के साथ फिर से बातचीत करने को राजी हैं। टीकरी और सिंघु दोनों सीमाओं पर लंगर बनाने और किसानों के साथ-साथ यहां आने वाले सभी लोगों को प्रेम पूर्वक खिलाने का सिलसिला जारी है।