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जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारेबाजी मामला: हाईकोर्ट ने कार्यक्रम के आयोजक की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

Fri, 03 Sep 2021 05:54 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 03 Sep 2021 05:54 PM IST
सार

जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने प्रीत सिंह की जमानत याचिका पर पुलिस को नोटिस जारी किया और उसे स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने के निर्देश दिए हैं।

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Jantar Mantar hate sloganeering delhi high court seeks Delhi Police response on bail plea of organiser preet singh of Jantar Mantar event
जंतर-मंतर पर हुई भारत जोड़ो आंदोलन की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने जंतर मंतर पर एक समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में आरोपी एवं सेव इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रीत सिंह की जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रीत सिंह ने हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट द्वारा 27 अगस्त को उनको जमानत न देने के फैसले के खिलाफ अपील की है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में अदालत के सामने मुद्दा जंतर-मंतर पर लगाए गए आपत्तिजनक नारे हैं। आरोपी ने आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी अधिनियम की धारा 51 (बी) के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक आदेश की अवज्ञा), इत्यादि आरोप में जमानत मांगी है। अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा मामले में रिपोर्ट दायर करने के बाद ही वे कुछ निर्णय देंगी। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तय की है।
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आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उनके मुवक्किल पर जंतर मंतर पर कार्यक्रम में एक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण व टिप्पणियां करने का आरोप है जबकि उसने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। इसके अलावा जेल में उनके मुवक्किल की तबीयत खराब हो रही है, जिसके आधार पर उसे जल्द जमानत प्रदान की जाए।
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निचली अदालत ने प्रीत सिंह को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपी स्पष्ट रूप से अन्य सहयोगियों के साथ भड़काऊ भाषणों में सक्रिय रूप से शामिल था और कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर दिए गए भाषणों में भड़काऊ भाषण से अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। इतना ही नहीं वह उक्त कार्यक्रम का सह-आयोजक भी था।

अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर पेश साक्ष्यों व अभियोजन पक्ष के तर्कों से स्पष्ट है कि आरोपी ने कार्यक्रम के आयोजन के मुख्य आयोजक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस आयोजन को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा यह आयोजन भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड-19 प्रोटोकॉल की पूर्ण अवहेलना करके जंतर-मंतर पर आयोजित किया गया।


अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि कार्यपालिका के मनमाने कृत्यों से भाषण की स्वतंत्रता के उनके अटूट अधिकार को कम नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा संविधान में सभा करने और अपने विचार व्यक्त करने के अधिकार दिए गए हैं, लेकिन ये अधिकार निरंकुश नहीं हैं और अंतर्निहित उपयुक्त प्रतिबंधों के साथ इनका उपयोग किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी ने स्वेच्छा से कार्यक्रम का आयोजन किया बल्कि सक्रिय रूप से भाग लिया और भड़काऊ भाषणों के विचारों और सामग्री को समर्थन प्रदान किया।
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