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आरोपी को क्यों बचाना चाहता है जेल प्रशासन?
धीरज बेनीवाल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Jan 2014 07:44 PM IST
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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली की तीस हजारी अदालत से तिहाड़ जेल पहुंचने में अदालती आदेश को 13 दिनों का समय लगा।
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तीस हजारी अदालत के सीएमएम विद्या प्रकाश ने आठ जनवरी 2014 को तिहाड़ जेल नंबर तीन के अधीक्षक के खिलाफ जांच स्वयं करने या डीआईजी जेल से करवाने का निर्देश जेल महानिदेशक को दिया था। अदालत ने जांच रिपोर्ट 22 जनवरी तक पेश करने का निर्देश दिया था।
वहीं जेल प्रशासन ने अदालत को बताया कि जांच का आदेश कार्यालय में 21 जनवरी को प्राप्त हुआ है। यानी जिस दिन सुनवाई होनी थी उससे ठीक एक दिन पहले, वो भी शाम को।
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लिहाजा जेल प्रशासन ने जांच करने के लिए अदालत से दो सप्ताह का समय मांग लिया है। मामला जेल नंबर तीन में बंद विचाराधीन कैदी एके ढकोलिया की मेडिकल रिपोर्ट से जुड़ा है जिसमें अधीक्षक ने उसे गंभीर रूप से बीमार बताया था।
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तिहाड़ जेल नंबर तीन के अधीक्षक की ओर से नौ दिसंबर 2013 को अदालत में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी एके ढकोलिया को पेश नहीं करने के पीछे उसके गंभीर रूप से बीमार होने का हवाला दिया गया था।
अदालत ने आरोपी की सेहत के संबंध में 13 दिसंबर 2013 को पेश रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी की सेहत के संबंध में जेल अधीक्षक की रिपोर्ट पूरी तरह गलत है।
क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने आरोपी को ‘टर्मिनली इल’ घोषित नहीं किया। बताते चलें कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एके ढकोलिया को अन्य आरोपियों के साथ जमीन बिक्री से जुड़े फर्जीवाड़े में अगस्त 2013 में गिरफ्तार किया था।