यही हाल रहा तो बिखर जाएगा गुडग़ांव का बीपीओ हब
- इस सेक्टर पर लगातार पड़ रही है चोट
- दिल्ली-एनसीआर में डीजल कैब पर पाबंदी से खलबली
- सरकारी उपेक्षा से घटता जा रहा है आईटी-बीपीओ का दायरा
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देश के बड़े बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) हब के बिखरने का खतरा बढ़ता जा रहा है। पहले से अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत आईटी-बीपीओ कंपनियों पर दिल्ली-एनसीआर में डीजल कैब के परिचालन पर पाबंदी से एक और बड़ी चोट पहुंची है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस सेक्टर के सबसे बड़े संघ नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैस्कॉम) को भी मैदान में पूरी तैयारी से उतरना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुड़गांव से कई कंपनियां देश के दूसरे शहरों में शिफ्ट होने लगी हैं। इसकी गति और बढ़ सकती है।
वहीं एशिया और यूरोपीय देशों से लगातार मिल रहे ऑफर पर भी यहां की कंपनियों ने तेजी से विचार करना शुरू कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो गुड़गांव के बीपीओ हब का पांव उखड़ने से कोई रोक नहीं सकता।
हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान आईटी-बीपीओ सेक्टर को गति देने की सरकारी मंशा अभी कागजों से हकीकत की जमीन पर नहीं उतर पाई है। इससे भी बीपीओ कंपनियों में काफी निराशा है। यह वही सेक्टर है जिसने गुडग़ांव को ऊंची उड़ान दी है। यहां पिछले एक दशक से कोई नई कंपनी नहीं आई है।
गुड़गांव की सॉफ्टेयर कंपनियां अपने लिए विकल्प तलाशने में जुट गई हैं। शहर की नगारो जैसी नामी सॉफ्टवेयर कंपनी ने अपने लिए गुड़गांव का विकल्प लताश लिया है। उसने जयपुर में नया ऑफिस लिया है। इस फेहरिस्त में और भी कंपनियां हैं।
हरियाणा के सभी सेक्टरों का कुल निर्यात 60 हजार करोड़ रुपये है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा आईटी-बीपीओ सेक्टर है। इन्हीं कंपनियों ने गुड़गांव को प्रदेश की आर्थिक राजधानी का तमगा भी दिया है। मगर यहां उनके लिए एक नहीं अनेक संकट खड़े हो गए हैं। जिसके कारण उनका मोह यहां से भंग होने लगा है।
थाईलैंड, सिंगापुर, मलयेशिया और फिलिपींस अब पश्चिमी देशों अमेरिका, कनाडा, और ब्रिटेन से कारोबार करने लगे हैं। प्राइम कॉल इंटरनेशनल की डायरेक्टर (एचआर) विनीता का कहना है कि पहले इन देशों के 60 फीसदी से अधिक कारोबार पर भारत का अधिपत्य था, जो अब टूटने लगा है।
डीजल कैब पाबंदी को अवसर मान रहे दूसरे देश
आईटी-बीपीओ व मैनेजमेंट विशेषज्ञ सचिन गुप्ता का कहना है कि वह गुडग़ांव की आईटी कंपनी कैटालिस्ट में डायरेक्टर (ऑपरेशंस) के तौर पर कार्य कर चुके हैं। उनका कहना है कि यह शहर बीपीओ के लिए काफी खास रहा है। मगर यहां का परिदृश्य अब नकारात्मक होने लगा है। दिल्ली-एनसीआर में डीजल कैब पर पाबंदी को कई देश अपने लिए अवसर के रूप में देख रहे हैं। थाइलैंड, मलयेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, फिलिपींस, ताइवान, ब्राजील, मोरक्को, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया और हंगरी से गुड़गांव को कड़ी टक्कर मिल रही है। यह यहां की कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अपना मोर्चा खोल चुके हैं।
इन्होंने किया गुडग़ांव से किनारा...
जीई अपना कारोबार जयपुर ले गई
आईबीएम ग्लोबल सर्विसेज भी जयपुर गई
एरिक्शन कंपनी कोलकाता का कर रही है रुख
टेक महिंद्रा ने अपना हेडक्वार्टर गुडग़ांव से पुणे शिफ्ट किया
सिलिकल वैली सिस्टेक इंदौर गई
अराना कैपिटल इंदौर गई
मैसवेल भी इंदौर गई
जेडटीई टेलिकॉम अहमदाबाद में कर रही है विस्तार
आईटी कपंनी इंफोसिस ने भुवनेश्वर में किया विस्तार
गुड़गांव में आईटी-बीपीओ कारोबार
गुड़गांव के आईटी-बीपीओ हब ने अपना सफर 11,000 करोड़ रुपये से शुरू किया था। जो वर्ष 2008-09 में 15,000 करोड़ रुपये हो गया। वर्ष 2011-12 में यह 21,400 करोड़ हो गया। वर्ष 2012-13 में यह 25,000 करोड़ रुपये के स्तर को छुआ। वर्ष 2013-14 में गुडग़ांव के आईटी हब का कारोबार 31,200 करोड़ रुपये के स्तर पर है।
बीपीओ सेक्टर एक नजर में...
कुल 600 बीपीओ कंपनियां
80 बड़े बीपीओ
1 लाख 50 हजार प्रत्यक्ष मैनपावर
4 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार
125 कॉल सेंटर
गुड़गांव में क्यों परेशान हैं आईटी-बीपीओ
गुड़गांव में क्यों परेशान हैं आईटी-बीपीओ
गुडग़ांव में दिनों दिन कॉस्ट बढ़ती जा रही है। ऑफिस स्पेस काफी महंगा
इंफ्रास्ट्रक्चर का भारी अभाव
बिजली की कमी से चलाना पड़ता है जनरेटर
अन-प्रोफेशनल वर्कफोर्स। दक्षिण भारत व महाराष्ट्र से हायर करने पड़ते हैं प्रोफेशनल्स। इस कारण बढ़ता जा रहा है खर्चा
ट्रैफिक की दिक्कत के कारण कंपनियों का करीब 40 फीसदी ट्रांसपोर्ट पर खर्च
आईटी सिक्योरिटी पॉलिसी का अभाव
डाटा सिक्योरिटी की खराब स्थिति कोई सख्त कानून नहीं
स्किल्ड मैनपावर की कमी
सड़कों की खराब स्थिति
सिवरेज-ड्रेनेज की हालत खराब
महंगी बिजली से बढ़ती जा रही परेशानी
रात में ट्रांसपोर्टेशन की अच्छी सुविधा नहीं
आवासीय सुविधाएं काफी महंगी
हाइटेक मॉनीटरिंग का अभाव
आईटी-बीपीओ विशेषज्ञों की राय
देखा जाए तो डीजल कैब पर पाबंदी से बीपीओ पर तात्कालिक बड़ा झटका लगा है। मगर इन्हें यहां परेशानी अन्य कई कारणों से भी है। इनके दूसरे राज्यों में और देशों में जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। अब बीपीओ तेजी से टीयर-2 व टीयर-3 शहरों की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं। इसमें जयपुर, लखनऊ, देहरादून और पुणे का नाम है। पूर्वी यूरोपीय देशों से भी गुडग़ांव को चैलेंज मिल रहा है।
-अवनीश सक्सेना, (अध्यक्ष, उद्योग विहार इंडस्ट्रियल एसोसिएशन)
गुड़गांव में आईटी-बीपीओ सेक्टर की हालत अच्छी नहीं है। जीई और आईबीएम ग्लोबल सर्विसेज यहां से जयपुर चली गईं। एरिक्शन कोलकाता का रुख कर रही है। टेक महिंद्रा ने अपना हेडक्वार्टर गुड़गांव से पुणे शिफ्ट कर लिया। सिलिकल वैली सिस्टेक इंदौर गई। अगर प्रदेश सरकार इनके लिए जल्द से जल्द कुछ बेहतर नहीं करेगी तो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है। -प्रदीप यादव (प्रेसीडेंट, हाइटेक इंडिया)
गुड़गांव में आईटी-बीपीओ कंपनियों को कई प्रकार की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। फिलिपींस, इथोपिया और बांग्लादेश जैसे देश भी इस मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जहां तक बीपीओ व आईटी कंपनियों के गुड़गांव जाने की बात है वह सिलसिला चल रहा है। इंफोसिस जैसी आईटी कंपनी गुड़गांव में है मगर अपने कैंपस का विस्तर यहां नहीं करके भुवनेश्वर में किया है। समस्याओं स्त्रत्त्के कारण कंपनियां गुड़गांव में अपने विस्तार से परहेज कर रही हैं। -हिमांशू दूबे (सीईओ, टेक्निया)