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क्या वाकई इतिहास दोहरा पाएगी चौटाला की पार्टी?

Mon, 01 Sep 2014 08:53 AM IST
Updated Mon, 01 Sep 2014 08:53 AM IST
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INLD wants to create a history again in elections.

इंडियन नेशनल लोकदल पिछले पांच विधानसभा चुनावों में फरीदाबाद में कुछ बेहतर नहीं कर सका है। इनेलो को फरीदाबाद क्षेत्र में अब तक मिले वोटों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो देखने को मिलेगा कि कभी इसकी आंधी चली तो कभी इसके प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।

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कई बार गठबंधन की राजनीति इनेलो को भी रास आई। वर्ष 1977 से लेकर अब तक के इतिहास में पहले देवीलाल फिर ओम प्रकाश चौटाला की अगुवाई में अलग-अलग नामों से चली आ रही पार्टी यहां पर शुरुआती दौर में ही अपना सबसे बेहतर परिणाम दे सकी है। पार्टी इस बार अकेले चुनावी मैदान में है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद इनेलो को इस बार काफी मेहनत करने की जरूरत होगी। वर्ष 1977 में प्रदेश में चली देवीलाल की लहर के कारण फरीदाबाद के छह विधानसभा क्षेत्रों में से राष्ट्रीय स्तर पर कई दलों के विलय पर बनी जनता पार्टी ने पांच सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव में सिर्फ बल्लभगढ़ की सीट उन्होंने गंवाई।
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वर्ष 1982 में देवीलाल की अगुवाई में लोकदल अस्तित्व में आया। जिले में उसने दो सीटों पर कब्जा किया।

पार्टी को उबार नहीं पाया भाजपा का साथ

INLD wants to create a history again in elections.

वर्ष 1987 में प्रदेश में लोकदल ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। पार्टी की लहर के चलते चार सीटों पर इनेलो ने कब्जा जमाया, जबकि एक सीट गठबंधन दल भाजपा को मिली।

वर्ष 1991 में चली सत्ता विरोधी लहर का असर फरीदाबाद की सीटों पर भी दिखा। सजपा के नाम से देवीलाल की अगुवाई में लड़े गए इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिल सकी। 1996 में समता पार्टी के बैनर पर पार्टी ने प्रदेश में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भी कोई भी प्रत्याशी अपनी जीत नहीं दर्ज कर सका।

2000 में इस पार्टी का नाम इंडियन नेशनल लोकदल हो गया। इस बार आईएनएलडी का गठबंधन भाजपा के साथ था। प्रदेश में तो इस गठबंधन की सरकार बनी, लेकिन जिले में इनेलो एक ही सीट हासिल कर सकी।

गठबंधन टूटने पर इनेलो वर्ष 2005 के चुनाव में अकेले मैदान में उतरी थी, लेकिन इस बार किसी भी सीट पर इनेलो को जीत हासिल नहीं हुई। वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद इसे सिर्फ पलवल में दो सीटें मिलें। इस बार फिर से इनेलो अकेले मैदान में उतरी है। पार्टी के शहरी जिलाध्यक्ष आरके चिलाना का कहना है कि इस बार भी पार्टी 1977 और 1987 का इतिहास दोहराएगी।

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