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IGNCA Exhibition : 119 साल पुरानी रामकिंकर बैज की राधा-कृष्ण पेंटिंग बनी आकर्षण का केंद्र, करोड़ों में है कीमत

Fri, 16 May 2025 06:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा राम नरेश, नई दिल्ली
राम नरेश, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 16 May 2025 06:39 AM IST
सार

शांतिनिकेतन कला परंपरा से जुड़े रामकिंकर की इस कलाकृति में राधा, कृष्ण और गोपियों को दर्शाया गया है। इसकी खास बात है कि उनकी रचनाओं में एक पात्र ऐसा अवश्य होता है, जो स्वयं रामकिंकर जैसा प्रतीत होता है।

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IGNCA Exhibition: 119 year old Ramkinkar Baij's Radha-Krishna painting becomes the center of attraction
सुनीत चोपड़ा का काम।  - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

119 साल पुरानी रामकिंकर बैज की राधा-कृष्ण पर आधारित जलरंग पेंटिंग आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शांतिनिकेतन कला परंपरा से जुड़े रामकिंकर की इस कलाकृति में राधा, कृष्ण और गोपियों को दर्शाया गया है।

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इसकी खास बात है कि उनकी रचनाओं में एक पात्र ऐसा अवश्य होता है, जो स्वयं रामकिंकर जैसा प्रतीत होता है। यह पेंटिंग न केवल भावनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका कलात्मक मूल्य भी करोड़ों में आंका गया है। 
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रामकिंकर बैज की ओर से यह पेंटिंग वर्ष 1906 में बनाई गई थी, जिसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सुनीत चोपड़ा की कला संग्रह की प्रदर्शनी को प्रदर्शित किया गया हैं। यहां देशभर के प्रतिष्ठित कलाकार रामकिंकर बैज, सुबोध गुप्ता और एसएच रज़ा की अनमोल रचनाएं कला प्रेमियों और संग्राहकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
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इस बीच संस्थान के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष (संरक्षण) अचल पाण्ड्या ने बताया कि कला केंद्र में रखी विरासत को सभी कला प्रेमियों और शोधार्थियों को दिखाने का उद्देश्य है। इस प्रेरणा की प्राप्ति संस्थान के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. सच्चिदानंद जोशी से हुई है। 

सुबोध गुप्ता की आरंभिक कोलाज रचना पीस भी यहां प्रदर्शित की गई है। यह वर्ष 1989 की है। कागज की कतरनों से बनी यह अनोखी रचना उनके आरंभिक दौर की अभिव्यक्ति है। इसके अलावा, भारत के आधुनिक कला आंदोलन के स्तंभ रहे एसएच रज़ा की बिंदुला तेर श्रृंखला की एक मूल सेरिग्राफ भी चर्चा का विषय है।

यह 120 प्रतियों में से 14वीं प्रति है, जिस पर स्वयं रजा के हस्ताक्षर हैं। रजा और वरिष्ठ वामपंथी विचारक सुनीत चोपड़ा के बीच की मित्रता इस कलाकृति को और भी मूल्यवान बनाती है। लाखों रुपये मूल्य की यह छपाई रजा के अद्वितीय सौंदर्यबोध और गहराई से जुड़े चिंतन की झलक प्रस्तुत करती है।


इन कलाकृतियों की उपलब्धता न केवल भारतीय कला के वैभव का प्रतीक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी संजोई जाएंगी। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए दूर-दूर से कला प्रेमी एकत्र हो रहे हैं।

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