'पीएम की जानकारी में हुआ 2जी घोटाला'
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2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा ने खुद को निर्दोष बताया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने जो भी फैसला लिया जनहित में लिया और उनके हर निर्णय से प्रधानमंत्री अवगत थे।
सोमवार को राजा ने अदालत के समक्ष अपने बयान दर्ज कराते हुए उक्त तर्क रखा। पटियाला हाउस स्थित विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष पेश राजा ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन में कोई अनियमितताएं नहीं बरती गईं।
आवंटन का जो भी फैसला लिया गया वह कैबिनेट का सामूहिक निर्णय था। राजा ने कहा कि उन्होंने जनहित में कानून के दायरे में रह कर फैसले लिए गए। जिससे मोबाइल कॉल की दरों में काफी कमी आई।
घोटाले से सरकार को फायदा हुआ है?
राजा ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि आवंटन में उन्हें कोई निजी फायदा नहीं हुआ। राजा ने कहा कि आवंटन में सरकारी खजाने को नुकसान नहीं हुआ बल्कि इससे सरकार के राजस्व में इजाफा हुआ।
राजा ने इस आरोप को गलत बताया कि उन्होंने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया। राजा ने कहा कि हर निर्णय दूरसंचार विभाग व कैबिनेट से सलाह कर किया गया।
कैबिनेट के अलावा सॉलीसीटर जनरल से भी राय लेने और प्रधानमंत्री को अवगत कराने व उनकी सहमति लेने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया गया।
780 पेजों में दर्ज हुआ बयान
राजा ने अभियोजन पक्ष द्वारा 1718 सवालों का विस्तृत जवाब दिया। उनका बयान करीब 780 पृष्ठों में दर्ज हुआ।
राजा के बयान दर्ज करते हुए विशेष न्यायाधीश ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जो भी बयान दर्ज किए जाएंगे वह राजा व अदालत के बीच सीधे सवाल-जवाब के तहत ही दर्ज किए जाएंगे।
इस मामले में ए राजा समेत कुल 17 आरोपी हैं। राजा ने कहा कि टीवी चैनल को ऋण के रूप में राशि प्रदान की गई थी जिसका पूरा ब्योरा दस्तावेजों में मौजूद है।
कैग ने बनाया सनसनीखेज
उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट में इसे सनसनीखेज बनाकर पेश किया। हालांकि रिपोर्ट में टेलीकॉम पॉलिसी को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा पूरे मामले की सर्वोच्च न्यायालय निगरानी कर रहा है और जांच एजेंसी सीबीआई ने अभी तक नहीं कहा कि सरकारी खजाने में कितना नुकसान हुआ।
राजा ने कहा,‘ मैने कभी भी अपने कार्यालय व पद का दुरुपयोग नहीं किया। राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के कारण मुझे फर्जी मामले में फंसाया गया है।’ राजा ने उस आरोप को भी गलत बताया कि जिसमें क्लीगानार टीवी के 200 करोड़ रुपये की रिश्वत प्रदान करने की बात कही गई थी।