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नई आवास नीति : लोगों को घर मिलेंगे
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 07 Feb 2014 12:59 PM IST
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सरकार की नई आवास नीति शहरवासियों को सस्ते आवास उपलब्ध कराएगी। साथ ही नई नीति के प्रावधान बिल्डरों के पाप काटने का भी काम करेंगे। बुधवार को प्रदेश सरकार ने नई आवास नीति पर सैद्धांतिक सहमति दी है।
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जल्द ही इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा। नीति का उद्देश्य जमीन का अधिकतम इस्तेमाल (आप्टिमम यूटिलाइजेशन), सहभागिता और सबको आवास है।
प्रदेश भर में जमीनों की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। गाजियाबाद में तो स्थिति और बुरी है। जमीन के दामों के आसमान छूने के कारण शहर में सस्ते मकान नहीं बन पा रहे हैं। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा बिल्डर्स उठा रहे हैं।
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बिल्डरों ने एकल यूनिट पर स्वीकृत से अधिक निर्माण कर लिया है। ऐसे बिल्डर प्रोजेक्ट्स में पार्किंग समेत कई मूलभूत सुविधाएं मिलती ही नहीं हैं। बिल्डरों ने सामुदायिक सुविधाओं की जगह तरह-तरह के निर्माण कर रखे हैं।
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ये होंगे फायदे
नई नीति लागू होने से अतिरिक्त एफएआर, मिक्सड लैंडयूज की पॉलिसी लागू होगी। ऐसा होने के बाद बिल्डरों के अतिरिक्त निर्माण कंपाउंड होंगे। अतिरिक्त एफएआर से पार्किंग आदि की सुविधाएं विकसित होंगी। मिक्सड लैंडयूज से आवासीय क्षेत्रों में चल रही गतिविधियां वैध होंगी। जीडीए को भी करोड़ों की आय होगी।
साकार होंगी नई योजनाएं
नई नीति में लैंड पूलिंग यानी किसानों की सहभागिता से नई योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है। ऐसा होने से एनएच-58 से लेकर पाइपलाइन रोड तक प्रस्तावित जीडीए की मेगा सिटी के लिए किसानों की सहभागिता से साकार होगी। शहर में बड़ी संख्या में आवास उपलब्ध होंगे। जीडीए उपाध्यक्ष संतोष यादव ने कहा कि नई आवास नीति शहरवासियों और किसानों के लिए हितकर साबित होगी। सीमित जगह का अधिकतम इस्तेमाल होगा। बड़ी संख्या में सस्ते आवास बनाए जा सकेंगे।