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35 दिन से अस्पताल में भर्ती, फिर भी नहीं दी जा रही मरीजों को छुट्टी

Sat, 27 Jun 2020 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 27 Jun 2020 05:06 AM IST
सार

  • केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल प्रबंधन पर कोरोना के मरीजों ने लगाए आरोप
  • प्रबंधन ने जानकारी न होने और इस पर संज्ञान लेने की बात कही
  • सूत्रों का कहना है कि बिस्तर भरे दिखाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, ताकि बाहर से कम मरीज आ सकें

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Hospitalized for 35 days, patients not being discharged
आरएमएल अस्पताल - फोटो : Social Media

विस्तार

केंद्र सरकार का डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) कोरोना उपचार को लेकर फिर सुर्खियों में है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के आरोपों के बाद अब अस्पताल में भर्ती मरीजों ने स्वस्थ होने के बाद भी उन्हें डिस्चार्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। 

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मरीजों का कहना है कि वे करीब 35 दिन से भर्ती हैं और रिपोर्ट भी निगेटिव है, लेकिन उन्हें घर नहीं भेजा जा रहा है। दिल्ली के योगेश शर्मा, दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर जयनारायण और विजय का कहना है कि उनका कई बार सैंपल लिया जा चुका है। हर बार कोई न कोई बहाना बताकर सैंपल ले जाते हैं, लेकिन रिपोर्ट नहीं बताते। विजय के अनुसार उनका सात बार सैंपल लिया जा चुका है। 
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हालांकि, इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोविड मरीजों को लेकर दिशा-निर्देशों के अनुसार ही उपचार किया जा रहा है। अगर कोई मरीज स्वस्थ है तो उसे अस्पताल में बेवजह नहीं रोका जा सकता।
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इन मरीजों के मामले में प्रबंधन ने जानकारी न होने और इस पर संज्ञान लेने की बात कही है। हालांकि, अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि बिस्तर भरे दिखाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, ताकि बाहर से कम मरीज आ सकें। 


आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के अनुसार अगर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज गंभीर नहीं है तो अस्पताल से छुट्टी मिलते वक्त उसकी दोबारा जांच की जरूरत नहीं है। केवल उन्हीं मरीजों की दोबारा जांच कराई जा सकती है, जो गंभीर अवस्था में भर्ती हुए हैं और उनकी चिकित्सीय निगरानी के लिए संक्रमण की स्थिति का पता लगाना अनिवार्य हो।

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