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'डॉक्टर डेथ' की खौफनाक कहानी: ऐसे बना सीरियल किलर, 100 से अधिक को मार मगरमच्छों को खिलाया; घाटे ने बनाया शैतान

Tue, 20 May 2025 06:58 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 20 May 2025 06:58 PM IST
सार

डॉक्टर देवेंद्र शर्मा और उसके साथी फर्जी ट्रिप के लिए ड्राइवरों को बुलाते थे, उनकी हत्या करते थे और उनके वाहनों को ग्रे मार्केट में बेच देते थे।' इसके बाद शवों को मगरमच्छों की आबादी के लिए मशहूर हजारा नहर में फेंक दिया जाता था, ताकि सभी सबूत मिटा दिए जाएं। 

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horrifying story of doctor death devendra sharma how he became serial killer he killed more than 100 people
डॉक्टर डेथ उर्फ देवेंद्र शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'डॉक्टर डेथ' के रूप में कुख्यात एक सीरियल किलर को दिल्ली पुलिस ने पिछले साल पैरोल पर भागने के बाद गिरफ्तार किया था। उन्होंने कहा कि अपराधी को एक दिन पहले राजस्थान के दौसा के एक आश्रम से गिरफ्तार किया गया था, जहां वह झूठी पहचान के साथ पुजारी के रूप में रह रहा था। आयुर्वेद चिकित्सक से अपराधी बने 67 वर्षीय देवेंद्र शर्मा को कई हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था और वह अपने पीड़ितों के शवों को उत्तर प्रदेश के कासगंज में हजारा नहर के मगरमच्छों से भरे पानी में फेंकने के लिए कुख्यात था।

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कोर्ट सुना चुका है मृत्युदंड
उसे दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में सात अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और गुड़गांव की एक अदालत ने उसे मृत्युदंड भी दिया है। पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम ने बताया कि बीएएमएस (आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा में स्नातक) डिग्री धारक देवेन्द्र शर्मा 2002 से 2004 के बीच कई टैक्सी और ट्रक चालकों की नृशंस हत्याओं के लिए तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था, जब वह अगस्त 2023 में पैरोल पर छूटा। 

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ड्राइवरों को बनाते थे शिकार
डीसीपी गौतम ने बताया, 'शर्मा और उसके साथी फर्जी ट्रिप के लिए ड्राइवरों को बुलाते थे, उनकी हत्या करते थे और उनके वाहनों को ग्रे मार्केट में बेच देते थे।' इसके बाद शवों को मगरमच्छों की आबादी के लिए मशहूर हजारा नहर में फेंक दिया जाता था, ताकि सभी सबूत मिटा दिए जाएं। 

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लंबा है आपराधिक इतिहास
अधिकारी ने बताया कि शर्मा का आपराधिक इतिहास लंबा है, जिसमें हत्या, अपहरण और डकैती के कम से कम 27 मामले शामिल हैं। 1998 से 2004 के बीच अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट चलाने के लिए वह पहली बार कुख्यात हुआ था। उसने कई राज्यों में काम कर रहे डॉक्टरों और बिचौलियों की मदद से 125 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट की सुविधा देने की बात कबूल की थी। 

गैस डीलरशिप डील में हुआ घाटा और चला गया अपराध की दुनिया में
1994 में एक असफल गैस डीलरशिप डील में भारी वित्तीय घाटा होने के बाद शर्मा अपराध की दुनिया में चला गया। एक साल बाद, उसने एक फर्जी गैस एजेंसी चलाना शुरू किया और बाद में अवैध अंग व्यापार में शामिल हो गया। उसके बाद उसके आपराधिक काम टैक्सी ड्राइवरों की लक्षित हत्याओं तक फैल गए। काम करने के तरीके में टैक्सी किराए पर लेना, ड्राइवरों की हत्या करना और उनके वाहनों को ग्रे मार्केट में बेचना शामिल था। शवों को मगरमच्छों को खिला दिया जाता था। शर्मा को किडनी रैकेट और सीरियल किलिंग दोनों के सिलसिले में 2004 में गिरफ्तार किया गया था। 

राजस्थान में पुजारी बनकर रहा था 
अधिकारी ने कहा, 'उसे दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में सात अलग-अलग हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और एक मामले में गुड़गांव की अदालत से उसे मौत की सजा भी मिली थी। पुलिस का मानना है कि वह 50 से अधिक हत्याओं के लिए जिम्मेदार था।' भगोड़े के रूप में अपने समय के दौरान, शर्मा राजस्थान के दौसा में एक आश्रम में पुजारी के वेश में रह रहा था। 

छह महीने बाद पता चली लोकेशन
डीसीपी ने कहा, 'शर्मा अगस्त 2023 में तिहाड़ जेल में सजा काटते समय पैरोल से भाग गया था और तब से फरार था। क्राइम ब्रांच को उसकी तलाश का काम सौंपा गया था। अलीगढ़, जयपुर, दिल्ली, आगरा और प्रयागराज सहित कई शहरों में छह महीने तक चले अभियान के बाद, टीम ने उसे दौसा के एक आश्रम में ट्रैक किया, जहां वह झूठी पहचान के साथ एक आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में रह रहा था।'

पहले भी तोड़ चुका है पैरोल
यह पहली बार नहीं है जब शर्मा पैरोल पर छूटकर फरार हुआ हो। 2020 में, वह 20 दिन की पैरोल के बाद वापस नहीं लौटा और दिल्ली में पकड़े जाने से पहले सात महीने तक फरार रहा। जून 2023 में, उसे सरिता विहार थाने में दर्ज एक मामले में फिर से दो महीने की पैरोल दी गई, लेकिन वह 3 अगस्त, 2023 के बाद गायब हो गया।

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