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Delhi NCR News: आदेश का अनुपालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने केंद्र और डीसीजीआइ से मांगा जवाब
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- दवाओं के गलत इस्तेमाल पर हाईकोर्ट ने तीन महीनों में फैसला लेने का दिया था आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ओजेंपिक जैसी डायबिटीज की दवाओं का वजन घटाने के लिए गलत इस्तेमाल से जुड़ी चिंताओं की जांच करने के लिए दिए गए आदेश का केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने केंद्र सरकार व भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआइ) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 21 मई को होगी।
जितेंद्र चौकसे की जनहित याचिका में ओजेंपिक सहित अन्य दवाओं के ऑफ-लेबल इस्तेमाल में तेजी से हो रही बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया गया था। जुलाई 2025 में याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने इन दवाओं के बिना किसी नियमन की उपलब्धता पर चिंता ज़ाहिर की थी। साथ ही अदालत ने सीडीएससीओ को निर्देश दिया था कि वह इन मुद्दों की जांच कर दवा बनाने वाली कंपनियों सहित सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर तीन महीने के अंदर उचित फैसला ले। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि समय-सीमा के भीतर सीडीएससीओ ने मामले में कोई भी औपचारिक फैसला नहीं लिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ओजेंपिक जैसी डायबिटीज की दवाओं का वजन घटाने के लिए गलत इस्तेमाल से जुड़ी चिंताओं की जांच करने के लिए दिए गए आदेश का केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा अनुपालन नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने केंद्र सरकार व भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआइ) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 21 मई को होगी।
जितेंद्र चौकसे की जनहित याचिका में ओजेंपिक सहित अन्य दवाओं के ऑफ-लेबल इस्तेमाल में तेजी से हो रही बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया गया था। जुलाई 2025 में याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने इन दवाओं के बिना किसी नियमन की उपलब्धता पर चिंता ज़ाहिर की थी। साथ ही अदालत ने सीडीएससीओ को निर्देश दिया था कि वह इन मुद्दों की जांच कर दवा बनाने वाली कंपनियों सहित सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर तीन महीने के अंदर उचित फैसला ले। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि समय-सीमा के भीतर सीडीएससीओ ने मामले में कोई भी औपचारिक फैसला नहीं लिया है।
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