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नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया सही नहीं, हाईकोर्ट ने खड़ा किया सवाल 

Thu, 21 Apr 2016 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 21 Apr 2016 09:21 AM IST
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high court raise question on national law university exam process

हाईकोर्ट ने राजधानी की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की दाखिला प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। अदालत ने कहा कि दाखिला प्रक्रिया सही नहीं है, यूनिवर्सिटी प्रशासन ये ध्यान रखें की समाज में उसकी अच्छी प्रतिष्ठा है।

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ऐसे में अगर प्रवेश के स्तर पर प्रतियोगिता में किसी भी तरह की कमजोरी आती है तो ये उसके शैक्षणिक महानता को प्राप्त करने के रास्ते में एक बाधा हो सकती है।
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न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने यह टिप्पणी करते हुए एक युवती की उस याचिका का निपटारा कर दिया जिसमें उसने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पीएचडी में दाखिला देने का आदेश देने की गुहार लगाई थी।
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हालांकि अदालत ने दाखिला प्रक्रिया पर सवाल उठाया है लेकिन याची को राहत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याची ने जिस शैक्षणिक सत्र में दाखिले की मांग की थी उसकी अवधि बीते चार वर्ष हो चुके हैं ऐसे में अब दाखिले का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने अपने फैसले में यूनिवर्सिटी को स्पष्ट निर्देश दिया की वह अपने यहां पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया 2016 शुरू करने से पहले दाखिला मानदंडों का पुन: अवलोकन करें और सही से विज्ञापन जारी करें।

उत्तर देने में नाकाम रही यूनिवर्सिटी

high court raise question on national law university exam process

अदालत ने कहा कि इस मामले में यूनिवर्सिटी संतोषजनक उत्तर देने में नाकाम रही है। डॉक्टरेट समिति द्वारा कोई मैरिट सूची तैयार नहीं की गई थी। तय प्रकिया की स्वीकृति भी नहीं ली गई।

वेबसाइट पर जारी अधिसूचना में भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि यह समझ नहीं आया कि जब प्रोस्पेक्टस में साफ लिखा है कि दस उम्मीदवारों का दाखिला होना है तो 13 लोगों को दाखिला कैसे दिया गया।

कानून का सिद्धांत है की किसी खेल के शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जाते हैं।  पेश मामले में अमिता अग्रवाल ने याचिका दायर की थी, याची के अनुसार उसने 2012 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पीएचडी में दाखिले के लिए आवेदन किया।

9 अगस्त 2012 को उसे ई मेल के जरिए सूचना दी गई की उसका लिखित परीक्षा के लिए चयन हुआ है और वह डॉक्टरेट कमेटी के समक्ष प्रस्तुत हो। इसके बाद 8 सिंतबर 2012 को कमेटी ने उसे अपने सिनाप्सिस में कुछ फेरबदल कर जमा कराने को कहा।

एक अक्टूबर 2012 को जारी उम्मीदवारों की सूची में उसका नाम नहीं था। याची का आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने पीएचडी दाखिला नियमों का पालन नहीं किया है।     

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