जानिए कैसे पांच सौ रुपये से शुरू कारोबार पहुंचा दो करोड़ के पार
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स्वरोजगार कर सफल उद्यमी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए हस्तशिल्प उद्योग में तरक्की की अपार संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में कम लागत से अच्छी कमाई की जा सकती है।
दिल्ली के विजय सेठी इसका उदाहरण हैं। उन्होंने हस्तशिल्प का कारोबार पांच सौ रुपये में शुरू किया था, जिसका आज सालाना टर्नओवर दो करोड़ से भी ज्यादा है।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में ईपीसीएच द्वारा आयोजित इंडियन हैंडीक्राफ्ट एंड गिफ्ट फेयर (आईएचजीएफ) में विजय सेठी उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।
वह जरी, एम्ब्रॉयड्री और ग्लास के बने घरेलू सजावटी समान और गिफ्ट आइटम के निर्यातक है। इन उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग अमेरिका, जर्मनी, जापान, कनाडा और अरब देशों में है।
जेब खर्च के 500 रुपये से काम शुरू किया
उन्होंने अपने कारोबार के शुरुआती दिनों के बारे में बताया कि कारोबार 1976 में जेब खर्च के 500 रुपये से स्टोन के हस्तशिल्प उत्पादों से शुरू किया था, जिसका वह खुद उत्पादन करते थे।
इसके बाद उन्होंने बड़े निर्यातकों के लिए सप्लाई करने लगे। इसके बाद 1981 में खुद उत्पादों को विदेश निर्यात करने लगे। 1996 में कारोबार दो करोड़ का हो गया। मेले में वह 1995 से प्रदर्शनी लगा रहे हैं। साथ में उनका बेटा नयन भी काम कर रहा है।
हस्तशिल्प के क्षेत्र में युवाओं के लिए बहुत संभावनाएं हैं। विदेशों में लोगों को हस्तशिल्प से बने अलग तरह के क्रिएटिव उत्पाद पसंद आ रहे हैं। यदि युवाओं के पास इनोवेटिव आइडिया हो तो वह कम लागत में ढेरों कमा सकते हैं। हालांकि, इसमें प्रतियोगिता भी है, लेकिन अच्छा काम करने वालों की जरूरत हमेशा रहती है।