दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं के साथ बारिश से राहत, पहाड़ों पर मानसून बना आफत
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Delhi: The national capital continues to receive light showers this morning after it witnessed a change in weather last night and received heavy rainfall, lightning and thunderstorm. Visuals from Vijay Chowk. pic.twitter.com/63s70ageXQ
— ANI (@ANI) July 5, 2020
मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामनी ने दिल्ली में शनिवार को भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली में 4 जुलाई को अच्छी बारिश की संभावना है।
उत्तराखंड में बारिश ने मचाई तबाही, 21 सड़कें बंद
उधर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में शनिवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश ने जमकर तबाही मचाई। बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में मलबा आने से 21 सड़कें बंद हो गईं। नदी-नाले उफान पर हैं। कई पुलियाएं और पैदल रास्ते बह गए हैं। रामनगर में सावल्दे नाले के उफान में मानसिक रूप से परेशान एक युवक फंस गया। ग्रामीणों ने रस्सी के सहारे नाले से बाहर निकालकर उसकी जान बचाई। यह युवक उस वक्त नाले पर बने पुल के नीचे बैठा था। धनगढ़ी और पनोद नाले के उफान पर आने से हाईवे पर जाम लग गया। वहीं, पंजाबी ढाबे के पास भारी-भरकम पेड़ गिरने से हाईवे पर दो घंटे जाम लग गया।
मुनस्यारी में पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गईं और बांसबगड़ में सुरक्षा दीवार गिरने से झूला पुल को खतरा हो गया है। खेतभराड़ में नदी के कटाव से पंचायत घर खतरे की जद में है। सुरिंगगाड़ में बनाया गया लकड़ी का अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया। इससे पांच हजार से अधिक की आबादी अलग-थलग पड़ गई है। कपकोट के खटगड़ा गधेरे पर बनी पुलिया ध्वस्त होने से तीन गांवों की करीब साढ़े तीन हजार की आबादी का तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
मलबे से थल-मुनस्यारी सड़क रातापानी, बनिक, पातलथोड़ और मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग मदकोट से बरम के बीच बंद हो गई है। भूकटाव से झूला पुल की सुरक्षा दीवार ध्वस्त हो गई। इससे पुल को खतरा पैदा हो गया है। यह झूलापुल राया, बजेता और डुंगरी तीन गांवों को जोड़ता है। बागेश्वर जिले में बारिश से कपकोट के खटगड़ा गधेरे में खटगड़ा, बसकूना, असों गांव को जोड़ने वाली पैदल पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। यह पुलिया तीनों गांवों को कपकोट तहसील, ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ती थी। काफलीगैर में कलवर्ट बंद होने से दुकानों में मलबा घुस गया। अल्मोड़ा के दफौट में कई पॉलीहाउस क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई घरों में मलबा घुस गया। रास्ते बह गए हैं। बसकूना में भी व्यापक तबाही मची है। घरों, खेतों में मलबा पट गया है। कोसी में सिल्ट आने से पंप ठप हो गए। इससे अल्मोड़ा में पेजयल आपूर्ति ठप रही। अतिवृष्टि से कपकोट के खटगड़ा में बिजली के कई पोल उखड़ गए हैं। बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त होने और पोल उखड़ने से गांव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। पहाड़ों में हुई वर्षा से शारदा नदी का जलस्तर शनिवार को बढ़ गया है। इसका जलस्तर 85 हजार क्यूसेक के पार पहुंच गया। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश मौर्य ने बताया कि नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक पहुंचने पर सुरक्षा के तहत बैराज से वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ती है।
इधर, नैनीताल में शनिवार सुबह दो घंटे मूसलाधार बारिश हुई। इस दौरान सीमेंट हाउस तल्लीताल क्षेत्र में भूस्खलन से पानी का टैंक और सड़क क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि टैंक बन रहे मकान के कॉलम से टकराकर रुक गया और बड़ा हादसा होने से बच गया। कालाढूंगी (नैनीताल) क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश से ग्रामसभा रामपुर चकलुवा, गुलजारपुर बंकी, पूरनपुर में फसलें हो गईं।
पिथौरागढ़ जिले की ये सड़कें बंद
मदकोट-दारमा, पौड़ी-घटकूना, बंगापानी-जाराजिबली, नाचनी-भैंसकोट, मसूरीकांडा-होकरा, बांसबगड़-गूठी, तेजम-शामा-कपकोट, थल-मुनस्यारी, मुनस्यारी जौलजीबी।
बागेश्वर जिले की ये सड़कें बंद
कपकोट-बागेश्वर, कांडा में ढालन-खुनौली सड़क, कपकोट की सुकुंडा सड़क, कपकोट-पोलिंग-गैरखेत-हरसीला सड़क, बसकुना सड़क 200 मी. हिस्से में क्षतिग्रस्त, दोफाड़, कपकोट-गैरखेत, तोली, धरमघर-माजखेत, शामा-नाकुरी, कपकोट-लीली, बघर सड़क।
आज तेज बौछारें पड़ने के आसार
राजधानी दून और आसपास के इलाकों में रविवार को भी तेज बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार गरज और चमक के साथ ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है। प्रदेश के अन्य कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
बिहार में बिजली गिरने से 20 की मौत, कई झुलसे
बिहार में बारिश और बिजली का कहर जारी है। शनिवार को सहरसा, आरा, सारण, गया, बक्सर और सासाराम में आसमान से बिजली गिरने की विभिन्न घटनाओं में 20 लोगों की मौत हो गई। सीवान, भभुआ, बक्सर और सासाराम में 20 लोग बुरी तरह घायल हो गए। पिछले सप्ताह बिहार में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में 90 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
बिजली गिरने को लेकर मौसम विभाग ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि घर से बाहर न निकलें। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विवेक सिन्हा के मुताबिक, ये स्थिति रविवार तक जारी रहेगी। इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को बिजली में जान गंवाने आठ लोगों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। शुक्रवार को समस्तीपुर में तीन, लखीसराय में दो के अलावा गया, बांका और जमुई में एक-एक लोगों की मृत्यु हुई थी।
एनडीआरएफ की 90 टीमें तैनात
नई दिल्ली। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) ने देशभर में बाढ़ बचाव कार्यों के लिए 90 से अधिक टीमों की तैनाती की है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नेे मानसून और बाढ़ के संबंध में तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को जानमाल का नुकसान रोकने के लिए बेहतर योजना बनाने के निर्देश दिए। एनडीआरएफ के महानिदेशक एसएन प्रधान ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए कुछ नई रणनीतियां बनाई गई हैं। एनडीआरएफ की टीमों के पास तापमान मापने के उपकरण, मास्क, सैनिटाइजर और आधारभूत चिकित्सा किट भी होगी। पिछले महीने पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ के दौरान बचाव कार्य में जुटे एनडीआरएफ के 60 जवान संक्रमित हो गए थे।
हिमाचल में आज से चार दिन भारी बारिश, अंधड़ की चेतावनी
शनिवार को प्रदेश भर में मौसम मिलाजुला बना रहा। धूप खिलने के साथ-साथ हल्के बादल भी छाए रहे। शुक्रवार रात को शिमला, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर समेत प्रदेश भर में जोरदार बारिश हुई। कांगड़ा में अंधड़ से मक्की की फसल खेतों में बिछ गई। आम के फल भी पेड़ों से झड़ गए। कांगड़ा के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति रही। बारिश के बावजूद न्यूनतम तापमान में कमी नहीं आने से रात को भी गर्मी का प्रकोप लगातार जारी है।
जम्मू में मानसून की पहली झमाझम बारिश, आज भी मेहरबान होंगे इंद्रदेव
जिले समेत संभाग के कई जिलों में शनिवार को मानसून की पहली तेज बारिश हुई। इससे शरीर को झुलसा देने वाली तपिश से राहत मिली। तापमान में गिरावट आई है। कश्मीर में देर शाम को बादल छा गए थे। घाटी के कई जिलों में दिन का तापमान 32-34 डिग्री तक चला गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार रविवार को भी जम्मू-कश्मीर में बारिश के आसार हैं। नौ जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में इंद्रदेव मेहरबान रहेंगे।
जम्मू में शनिवार की शुरुआत हल्के बादलों के साथ हुई। एक समय लग रहा था कि बारिश हो जाएगी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तपिश के साथ उमस ने तेवर दिखाए। दोपहर को हर कोई पसीने से तरबतर हो रहा था। गर्मी के बीच बिजली कटौती ने आग में घी डालने का काम किया।
दिनभर लोग उमस से परेशान रहे। लेकिन शाम को एकाएक काली घटाएं छा गईं। तेज हवाओं और बादलों की गड़गड़ाहट के साथ झमाझम बारिश हुई। जम्मू में दिन का तापमान 38.1 और न्यूनतम 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
दिन में आर्द्रता 65 प्रतिशत रही। कटड़ा में दिन का तापमान 34.4 और न्यूनतम 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बनिहाल में दिन का तापमान 30.2, बटोत में 29.8 और भद्रवाह में 33.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
श्रीनगर में तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रहा। अमूमन ठंडे रहने वाले काजीकुंड, कुपवाड़ा और कोकरनाग में तापमान 30 से 34 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया। पहलगाम न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा रहा।
नेपाल के बझांग जिले में भूस्खलन से एक ही परिवार के छह लोग जिंदा दफन
नेपाल के बझांग जिले के केदारसु नगर पालिका वार्ड नंबर आठ के मल्लेसी में भूस्खलन से एक परिवार के छह लोग जिंदा दफन हो गए, जबकि एक व्यक्ति लापता है। छह लोगों के शव नेपाल प्रहरी ने बरामद कर लिए हैं।
नेपाल प्रभारी से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात हुई बारिश के साथ गांव के ऊपर से आए भूस्खलन ने केदारसु नगरपालिका आठ के मल्लेसी में 20 घरों को बहा दिया था। रात में भूस्खलन की जानकारी के बाद घर के अंदर मौजूद अन्य लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन भूस्खलन में सात लोग दब गए।
इनमें डेल जेथरा (81), देवी जेथरा (43) शांति जेथरा (16), प्रयाग जेथरा (16), संतू जेठारा (15), अस्मिता जेथरा (13) के शव मिल गए हैं, जबकि गिरी जेठारा अभी लापता है। भूस्खलन ने 22 भैंसों, 65 बकरियों और 24 गायों को भी बहा दिया। भूस्खलन के बाद बस्ती के मध्य हिस्से में 65 परिवार रह रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, भूस्खलन से खेती करने और खेती करने वाली करीब आधी जमीन भूस्खलन की जद में आई है।
दक्षिणी जापान में भारी बारिश और भूस्खलन, दर्जनों लापता
दक्षिणी जापान में भारी बारिश से शनिवार को बाढ़ आने के साथ ही कई इलाकों में भूस्खलन हुआ, इस दौरान दर्जनों लापता हो गए और अनेक लोग स्वयं को सुरक्षित निकाले जाने के इंतजार में घर की छतों पर खड़े नजर आए।
रात भर मूसलाधार बारिश होने के बाद कुमामोतो और कागोशीमा के दक्षिणी प्रांतों में 75 हजार से अधिक निवासियों को इलाका खाली करने को कहा गया। एनएचके टीवी के एक वीडियो में दिखाया गया है कि कुमा नदी से निकल रहे मटमैले पानी में कुमामोतो के हितोयोशी के बड़े हिस्से जलमग्न दिख रहे हैं। कई गाड़ियां आधे से ज्यादा डूब गईं।
घरों में कीचड़ घुस गया और बाढ़ के पानी में उखड़े हुए पेड़ों के तने नजर आ रहे थे। कुमामोतो के अधिकारियों ने कहा कि वे नुकसान का आकलन कर रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कार्यबल का गठन किया है और लापता लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रतिबद्धता जताई है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने पूर्व में कुमामोतो के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी लेकिन बाद में इस चेतावनी का स्तर कम किया।