कोर्ट के एक और मामले में फंसते-फंसते बचे केजरीवाल
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री को जेल से आम लोगों व कार्यकर्ताओं के नाम तिहाड़ जेल से खुला पत्र जारी करने के मामले में फिलहाल राहत मिल गई। हाईकोर्ट पत्र व आप की वेबसाइट पर रोक लगाने संबंधी दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
याचिका में इसे आम लोगों को कानून के प्रति भडकाने का रवैया बताते हुए केजरीवाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जनहित याचिका के जरिए इस प्रकार के मुद्दे उठाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। खंडपीठ ने कहा कि आप पार्टी ले केजरीवाल के पत्र को भी अपनी वेबसाइट से हटा लिया है ऐसे में वेबसाइट पर भी प्रतिबंध लगाने का औचित्य नहीं है।
आम लोगों को लिखा था खुला पत्र
खंडपीठ ने कहा कि याचि यदि चाहे तो निचली अदालत में आपराधिक मुकदमा दायर करने के लिए याचिका दायर कर सकता है। यह याचिका अधिवक्ता विवेक नारायण ने दायर की थी।
याचि ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता नितिन गडकरी मानहानि मामले में जमानती मुचलका न भरने के कारण अदालत ने केजरीवाल को 23 मई को जेल भेज दिया था और उन्होंने उसी शाम को तिहाड़ जेल से आम लोगों व कार्यकर्ताओं के नाम खुला पत्र जारी कर दिया। पत्र में उन्होंने जेल में होने के पीछे की परिस्थितियों संबंधी तर्क दिए है।
केजरीवाल की मंशा समाज को भड़काना है
उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने पत्र के जरिए अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए लोगों को कानून का पालन न करने के लिए भडकाने का रवैया अपनाया है जो समाज के लिए खतरनाक है। उन्होंने पत्र के जरिए अदालत के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का रवैया गंभीर मानहानि व तिरस्कारपूर्ण आचरण का है।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल द्वारा जारी पत्र आप की वेबसाइट पर है। आप के पदाधिकारी इस पत्र को बांट रहे है, इससे अदालत के आदेश को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर भी पत्र जारी किया गया है। आप कार्यकर्ताओं की योजना पत्र को हर घर में पहुंचाने की है। वे समाज में अराजकता फैला रहे है।