पैसे देकर नेताजी को लाने पड़ रहे समर्थक
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बेशक चुनाव आयोग ने प्रचार के लिए कम समय दिया है, लेकिन इस समय के लिए भी उम्मीदवारों को समर्थक नहीं मिल रहे। कुछ करीबी रिश्तेदार और पड़ोसियों को छोड़ दें तो प्रचार के लिए नेताजी को अपने साथ में घूमने के लिए पैसे देकर समर्थक लाने पड़ रहे हैं।
नेताजी के साथ गली-मोहल्लों में घूमने के लिए 20 से 35 वर्ष के समर्थकों की मांग ज्यादा है। ऐसे समर्थकों को हर दिन 200 से 300 रुपये और खाना-पानी दिया जा रहा है।
अगर समर्थक पढ़ा-लिखा और कद-काठी अच्छी हो तो रकम 500 रुपये तक है। ऐसे समर्थक चुनाव प्रचार के लिए सुबह 10 से 11 बजे निकलते हैं और 4 से 5 बजे घर लौट आते हैं।
मुखर्जी नगर जैसे इलाके में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग-अलग राज्यों से छात्र आए हुए हैं। ये भी किसी न किसी तरह से ऐसे उम्मीदवारों की पहुंच में आ गए हैं और जेब खर्च के लिए प्रचार में शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा जेजे क्लस्टर इलाके के ऐसे युवक, जिनकी उम्र 20 से 30 वर्ष है और घर पर बैठे रहते थे, वे भी इन दिनों नेताजी के साथ प्रचार में शामिल होकर पैसे कमा रहे हैं।
प्रचार में चढ़ने लगा है शराब का सुरूर
चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए राजधानी में शराब का सुरूर बढ़ने लगा है। चुनाव आयोग की टीमों ने चुनाव घोषणा के बाद अब तक सैकड़ों लीटर अवैध शराब जब्त की है।
यही नहीं, सोमवार यानी 26 जनवरी को ड्राई डे होने के बावजूद भी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से देसी-विदेशी शराब जब्त की गई। चुनाव आयोग भी मानता है कि दिल्ली में एक खास वर्ग के मतदाता जो कि झुग्गियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहते हैं, उन्हें लुभाने के लिए शराब का इस्तेमाल किया जाता है।
यही वजह है कि आयोग ने फ्लाइंग स्क्वायड टीम के अलावा आबकारी विभाग और पुलिस को शराब की अवैध बिक्री से निपटने पर खास निगरानी रखने का निर्देश दिया है। अगर किसी दुकान पर अचानक शराब की बिक्री में बढ़ोत्तरी हो रही है तो उसकी रिपोर्ट भी आबकारी विभाग को देनी होगी।