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हरियाणा बनेगा स्वदेशी की आदर्श प्रयोगशाला, सात बिंदुओं पर सरकार का फोकस
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 05 Jul 2016 01:45 AM IST
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संप्रग सरकार के एक दशक में कमजोर पड़ चुकी स्वदेशी अपनाने की आवाज को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सान पर चढ़ाने की रूपरेखा तैयार कर ली है। सघ ने इसकी जिम्मेदारी स्वदेशी जागरण मंच को सौंपी है।
जो गांव-गांव स्वदेशी की अलख जगाएगी। मंच ने मनोहर सरकार को सात बिंदुओं पर काम करने का आग्रह किया। ताकि प्रदेश को स्वदेशी का प्रदेश मॉडल बनाया जा सके। इसी निर्मित 12-14 नवंबर को कुरूक्षेत्र में राष्ट्रीय सभा का आयोजन भी किया जाएगा। ताकि इस मॉडल को देशभर के कार्यकर्ता देख सकें।
दरअसल, विदेशी सामान का रास्ता बंद करने जैसे कदम तो कोई सरकार नहीं उठा सकती। लिहाजा, जनता को ही स्वदेशी सामान खरीदने और अच्छे उत्पाद तैयार करने के लिए माहौल बनाने की जरूरत है। इस काम के लिए स्वदेशी जागरण मंच का सबसे ज्यादा जोर हरियाणा पर होगा।
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जहां इस समय उनकी समान विचार की सरकार है। इसलिए मंच ने प्रदेश को स्वदेशी की आदर्श प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मंच ने गांव-किसान और कुटीर उद्योगों को लक्षित कर स्वदेशी अभियान को गति देने की जमीनी तैयारी शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वदेशी अर्थव्यवस्था के मॉडल को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी चिंतित है। सरकारी कंपनी वीटा द्वारा देशी गाय के दूध को बाजार में उतारने, गऊ हत्या विधेयक, सौर ऊर्जा, जैविक खेती और कुरूक्षेत्र को विशेष धार्मिक स्थल घोषित कर करोड़ों रुपए की ग्रांट आंवटन इसका उदाहरण है।
योजना को कारगर बनाने के लिए मंच स्वदेशी को आम जनमानस में पहुंचाने के लिए मंच ने चरणबद्व आंदोलन चलाने की रणनीति बनाई है। जहां लोगों को स्वेदशी सैनिक बनाकर प्रदेश को स्वदेशी की आदर्श प्रयोगशाला के रूप में उभारा है। वहीं, सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का विरोध करना है। नवंबर को होने वाली राष्ट्रीय सभा इसी दोहरी रणनीति का हिस्सा है।
मनोहर सरकार के साथ मंच का संवाद अच्छा है। इसलिए हमारा प्रयास है कि प्रदेश में स्वदेशी को बढ़ावा मिले। मंच का स्पष्ट कहना है कि भारत का विकास भारतीय तकनीकी और भारत के पैसे से ही संभव है।
सतीश कुमार, उत्तर भारत संगठक, स्वदेशी जागरण मंच
इन बिंदुओं पर चल रहे है काम
-स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग(विदेशी वस्तु का बहिष्कार करना)
-लघु एवं कुटिर उद्योगों को बढ़ावा देना(विशेषत: सौर ऊर्जा का उपयोग)
-जैविक खेती को बढ़ावा देना।
-पर्यावरण की सुरक्षा एवं गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बल देना
-आर्थिक समृद्वि की योजना जिला स्तर पर बनाना।
-हरियाणा को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाना(विशेषत: कुरूक्षेत्र)
-भारतीय जीवन शैली अपनाना
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जो गांव-गांव स्वदेशी की अलख जगाएगी। मंच ने मनोहर सरकार को सात बिंदुओं पर काम करने का आग्रह किया। ताकि प्रदेश को स्वदेशी का प्रदेश मॉडल बनाया जा सके। इसी निर्मित 12-14 नवंबर को कुरूक्षेत्र में राष्ट्रीय सभा का आयोजन भी किया जाएगा। ताकि इस मॉडल को देशभर के कार्यकर्ता देख सकें।
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दरअसल, विदेशी सामान का रास्ता बंद करने जैसे कदम तो कोई सरकार नहीं उठा सकती। लिहाजा, जनता को ही स्वदेशी सामान खरीदने और अच्छे उत्पाद तैयार करने के लिए माहौल बनाने की जरूरत है। इस काम के लिए स्वदेशी जागरण मंच का सबसे ज्यादा जोर हरियाणा पर होगा।
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जहां इस समय उनकी समान विचार की सरकार है। इसलिए मंच ने प्रदेश को स्वदेशी की आदर्श प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मंच ने गांव-किसान और कुटीर उद्योगों को लक्षित कर स्वदेशी अभियान को गति देने की जमीनी तैयारी शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वदेशी अर्थव्यवस्था के मॉडल को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी चिंतित है। सरकारी कंपनी वीटा द्वारा देशी गाय के दूध को बाजार में उतारने, गऊ हत्या विधेयक, सौर ऊर्जा, जैविक खेती और कुरूक्षेत्र को विशेष धार्मिक स्थल घोषित कर करोड़ों रुपए की ग्रांट आंवटन इसका उदाहरण है।
योजना को कारगर बनाने के लिए मंच स्वदेशी को आम जनमानस में पहुंचाने के लिए मंच ने चरणबद्व आंदोलन चलाने की रणनीति बनाई है। जहां लोगों को स्वेदशी सैनिक बनाकर प्रदेश को स्वदेशी की आदर्श प्रयोगशाला के रूप में उभारा है। वहीं, सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का विरोध करना है। नवंबर को होने वाली राष्ट्रीय सभा इसी दोहरी रणनीति का हिस्सा है।
मनोहर सरकार के साथ मंच का संवाद अच्छा है। इसलिए हमारा प्रयास है कि प्रदेश में स्वदेशी को बढ़ावा मिले। मंच का स्पष्ट कहना है कि भारत का विकास भारतीय तकनीकी और भारत के पैसे से ही संभव है।
सतीश कुमार, उत्तर भारत संगठक, स्वदेशी जागरण मंच
इन बिंदुओं पर चल रहे है काम
-स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग(विदेशी वस्तु का बहिष्कार करना)
-लघु एवं कुटिर उद्योगों को बढ़ावा देना(विशेषत: सौर ऊर्जा का उपयोग)
-जैविक खेती को बढ़ावा देना।
-पर्यावरण की सुरक्षा एवं गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बल देना
-आर्थिक समृद्वि की योजना जिला स्तर पर बनाना।
-हरियाणा को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाना(विशेषत: कुरूक्षेत्र)
-भारतीय जीवन शैली अपनाना