मोदी की कैबिनेट में शामिल होने की रेस जीते हर्षवर्धन
भले ही चांदनी चौक और गौतमबुद्ध नगर में फासला हो, लेकिन यहां से चुने गए सांसद सहपाठी रहे हैं। पेशे से दोनों डॉक्टर हैं, लेकिन राजनीतिक अनुभव में डॉ. हर्षवर्धन अपने सहपाठी डॉ. महेश शर्मा से काफी आगे हैं।
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार में हर्षवर्धन कैबिनेट मंत्री बनने में सफल हो गए।
मालूम हो कि डॉ. महेश शर्मा और डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली के दरियागंज के एक स्कूल में साथ-साथ पढ़ाई की है। अलग-अलग संस्थानों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद डॉ. महेश शर्मा ने नोएडा का रुख किया।
साथ पढ़े, साथ लड़े लेकिन मंत्री बना एक
हर्षवर्धन राजनीति में पहले आए। वह दिल्ली सरकार में मंत्री भी रहे और साथ ही अपने पेशे से भी जुडे़ रहे, जबकि महेश शर्मा ने डॉक्टरी पेशे को आगे बढ़ाया और अस्पतालों का निर्माण कराया।
डॉ. महेश ने 2009 में ही सक्रिय राजनीति में कदम रखा और गौतमबुद्ध नगर से लोक सभा का चुनाव लड़ा था। हार जाने के बाद जब 2012 में विधान सभा के चुनाव हुए तो नोएडा से वह विधायक चुने गए।
2014 के लोकसभा चुनाव में गौतमबुद्ध नगर से डॉ. महेश शर्मा सांसद बने और चांदनी चौक से डॉ. हर्षवर्धन चुने गए।
उम्मीदों पर फिरा पानी
लोगों को उम्मीद थी कि दोनों को ही कैबिनेट में जगह मिलेगी, लेकिन बाजी हर्षवर्धन मार ले गए। यह कहा जा सकता है कि राजनीतिक अनुभव को देखते हुए हर्षवर्धन आगे रहे हैं इसी का फायदा उन्हें मिला है।
डॉ. महेश शर्मा को मंत्री पद न मिलने ये उनके समर्थकों और चाहने वालों में थोड़ी मायूसी है। क्योंकि ऐसा माना जा रहा थस कि मोदी सरकार में उन्हें राज्यमंत्री का पद दिया जा सकता है।